शादी समारोह से ले जाकर युवक की हत्या मामले में कोर्ट का फैसला, दो नाबालिगों को 10-10 साल की सजा
राजस्थान के कोटा में चर्चित अरुण मेहरा हत्याकांड में करीब 20 महीने बाद अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शादी समारोह से बहाने से ले जाकर चाकू से हत्या करने के मामले में दो नाबालिगों को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने दोनों पर जुर्माना भी लगाया, जबकि एक दोषी को आर्म्स एक्ट के तहत अतिरिक्त सजा भी दी गई।
20 महीने बाद आया अदालत का फैसला
कोटा के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट ने बहुचर्चित अरुण मेहरा हत्याकांड में दोनों नाबालिग आरोपियों को दोषी मानते हुए 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा एक नाबालिग को अवैध हथियार के इस्तेमाल के मामले में आर्म्स एक्ट के तहत एक वर्ष की अतिरिक्त सजा सुनाई गई। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शादी समारोह से बहाने से ले जाकर की गई थी हत्या
अभियोजन के अनुसार यह घटना 14 नवंबर 2024 की है। आर्केपुरम थाना क्षेत्र के आंवली रोड निवासी 21 वर्षीय अरुण मेहरा एक शादी समारोह में शामिल होने गया था। इसी दौरान दोनों नाबालिग आरोपी उसे किसी बहाने से अपने साथ बाइक पर ले गए। आरोप है कि पुरानी रंजिश के चलते वे उसे सुनसान स्थान पर ले पहुंचे, जहां पहले से हत्या की साजिश तैयार थी। इसके बाद चाकू से उस पर ताबड़तोड़ हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।
चाकू के कई वार के बाद घायल अवस्था में छोड़कर भागे
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अरुण मेहरा के सीने, हाथ और पैरों पर कई बार चाकू से हमला किया। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों उसे लहूलुहान हालत में एक खाली प्लॉट में छोड़कर मौके से फरार हो गए। स्थानीय लोगों की सूचना पर घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था और पुलिस ने जांच तेज कर आरोपियों को कानून के दायरे में लाया।
अभियोजन के साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़े साक्ष्य, गवाहों के बयान और जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों नाबालिगों को हत्या का दोषी माना। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध प्रमाण आरोपियों की संलिप्तता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। फैसले के साथ ही एक आरोपी को आर्म्स एक्ट के उल्लंघन के मामले में अलग से एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई, जिससे यह मामला कानूनी रूप से भी महत्वपूर्ण बन गया।
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