भरतपुर के ‘अपना घर आश्रम’ ने रचा भावुक इतिहास, 14 और 20 साल बाद अपनों से मिले दो बिछड़े लोग
राजस्थान के भरतपुर स्थित ‘अपना घर आश्रम’ ने मानवता और सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करते हुए वर्षों से अपने परिवारों से बिछड़े दो लोगों को उनके परिजनों से मिलाया। उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति का 14 वर्ष और मध्यप्रदेश के दूसरे व्यक्ति का 20 वर्ष बाद अपने परिवार से पुनर्मिलन हुआ। लंबे इलाज, पुनर्वास और पहचान की प्रक्रिया के बाद जब दोनों अपने अपनों से गले मिले तो आश्रम परिसर भावनाओं से भर उठा और वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
14 साल बाद परिवार से मिले विक्रम, पत्नी की उम्मीद हुई पूरी
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर निवासी विक्रम, जिन्हें परिवार टिंकू के नाम से जानता था, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते करीब 14 वर्ष पहले घर से लापता हो गए थे। परिवार ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतने के साथ परिजनों ने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। इस बीच विक्रम दिल्ली में असहाय अवस्था में मिले, जहां से उन्हें ‘अपना घर आश्रम’ लाया गया। इलाज और लगातार देखभाल के बाद उनकी सेहत और याददाश्त में सुधार हुआ, जिससे वे अपने गांव और परिवार की जानकारी दे सके।
इलाज और पुनर्वास के बाद मिली नई जिंदगी
आश्रम में चिकित्सकीय उपचार, नियमित देखभाल और पुनर्वास की प्रक्रिया के दौरान विक्रम की शारीरिक और मानसिक स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होती गई। जब उन्होंने अपने गांव और परिजनों की पहचान बताई, तो आश्रम की टीम ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण प्रतिनिधियों की मदद से परिवार तक सूचना पहुंचाई। वीडियो कॉल के जरिए जब परिजनों ने वर्षों बाद विक्रम को देखा, तो भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। अगले ही दिन परिवार भरतपुर पहुंचा और लंबे इंतजार के बाद यह पुनर्मिलन संभव हो सका।
पत्नी बोली- उम्मीद छोड़ दी थी, आज परिवार फिर पूरा हुआ
वर्षों के संघर्ष के बाद पति को सामने देखकर विक्रम की पत्नी निर्मला अपनी भावनाओं को रोक नहीं सकीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके पति दोबारा जीवित मिलेंगे। परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने बच्चों का पालन-पोषण किया, लेकिन मन में पति की कमी हमेशा बनी रही। वर्षों बाद हुए इस मिलन को उन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा उपहार बताया और आश्रम के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। यह पल वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए बेहद भावुक था।
20 साल बाद छिंदवाड़ा के राजू भी लौटे अपने घर
दूसरी ओर मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा निवासी राजू भी लगभग दो दशक पहले अपने घर से बिछड़ गए थे। बाद में उन्हें गुजरात से रेस्क्यू कर भरतपुर के आश्रम में लाया गया, जहां उनका इलाज और पुनर्वास किया गया। स्वास्थ्य में सुधार आने के बाद उन्होंने अपने गांव और परिवार की जानकारी दी। सूचना मिलने पर उनके परिजन भरतपुर पहुंचे। शुरुआत में वर्षों का अंतराल होने के कारण पहचान आसान नहीं थी, लेकिन बचपन की यादों और पारिवारिक बातों ने रिश्तों की पुष्टि कर दी। इसके बाद परिवार राजू को अपने साथ घर ले गया।
मानवता और पुनर्वास का प्रेरक उदाहरण बना आश्रम
दोनों परिवारों ने ‘अपना घर आश्रम’ की सेवा भावना, चिकित्सा व्यवस्था और पुनर्वास कार्यों की सराहना करते हुए इसे मानवता का सशक्त उदाहरण बताया। परिजनों का कहना था कि सड़क पर बेसहारा और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को सम्मानजनक जीवन देना और उन्हें दोबारा उनके परिवारों से मिलाना समाज के लिए प्रेरणादायक कार्य है। यह घटना बताती है कि समर्पित प्रयास, संवेदनशील देखभाल और सही पुनर्वास से वर्षों पुरानी दूरियां भी समाप्त की जा सकती हैं और कई परिवारों की खोई हुई खुशियां वापस लौट सकती हैं।
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