धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, राहुल गांधी बोले- पहले जवाबदेही, फिर होगी चर्चा
संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था और कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर सियासी टकराव और तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद पर बने रहने तक इस मुद्दे पर कोई सार्थक चर्चा संभव नहीं है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार से जवाबदेही तय करने, छात्रों से जुड़े मामलों पर कार्रवाई करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक माफी की मांग उठाई है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष का सख्त रुख
लोकसभा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष की पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों और छात्रों के बीच पैदा हुए अविश्वास की स्थिति में जवाबदेही तय होना जरूरी है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा मंत्री को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक विपक्ष इस विषय पर किसी भी चर्चा में शामिल नहीं होगा। उनके इस बयान के बाद संसद में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
सदन में बोलने का अवसर नहीं मिलने का लगाया आरोप
राहुल गांधी ने संसदीय कार्यवाही पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान का जवाब देना चाहते थे, तब उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। राहुल गांधी का कहना था कि संसदीय परंपरा के अनुसार यदि किसी सदस्य का नाम लिया जाता है तो उसे जवाब देने का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ और उनका माइक बंद कर दिया गया। उन्होंने इसे संसदीय परंपराओं के विपरीत बताते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
विपक्ष ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
राहुल गांधी ने विपक्ष की ओर से तीन प्रमुख मांगों को दोहराया। पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की है। दूसरी मांग छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई और हिंसा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की है। तीसरी मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों के प्रति सार्वजनिक माफी की है। विपक्ष का कहना है कि इन मांगों पर सरकार की स्पष्ट प्रतिक्रिया आने के बाद ही संसद में इस मुद्दे पर सकारात्मक चर्चा का माहौल बन सकता है।
कार्ति चिदंबरम बोले- केवल घोषणा नहीं, ठोस व्यवस्था चाहिए
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट के मुद्दे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल अदालतों की घोषणा पर्याप्त नहीं होती, बल्कि न्यायाधीशों, कोर्ट स्टाफ और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी उतनी ही जरूरी है। उनके अनुसार छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था आवश्यक है।
नसीर हुसैन और दीपेंद्र हुड्डा ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष और छात्र जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, सरकार को पहले उन पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनका कहना था कि विपक्ष की प्राथमिकता शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करना और छात्रों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना है।