अन्ना हजारे भी छात्रों के समर्थन में उतरे, अहिल्यानगर में करेंगे मौन आंदोलन; पीएम मोदी को लिखा पत्र
NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और युवाओं की बढ़ती नाराजगी के बीच वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई, संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की और जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। साथ ही आज महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में छात्रों के समर्थन में मौन आंदोलन करने का भी फैसला किया है।
अहिल्यानगर में छात्रों के समर्थन में करेंगे मौन आंदोलन
देशभर में परीक्षा प्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अन्ना हजारे अब स्वयं भी छात्रों के समर्थन में मैदान में उतर रहे हैं। उनके सहयोगियों के अनुसार, वह महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित वाडिया पार्क के गांधी स्मारक पर मौन आंदोलन करेंगे। इस दौरान वे छात्रों और युवाओं से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को समझेंगे। अन्ना हजारे का मानना है कि युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण संवाद के जरिए समाधान तलाशना सबसे उचित तरीका है।
प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जताई चिंता
अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने पत्र में दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र में किसी भी असहमति का समाधान बातचीत से निकलना चाहिए, न कि टकराव से। उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों की मांगों को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानने के बजाय युवाओं की वास्तविक चिंताओं के रूप में देखा जाए। उनके अनुसार, सरकार और छात्रों के बीच संवाद की प्रक्रिया मजबूत होना समय की आवश्यकता है।
‘जवाबदेही तय होगी तो व्यवस्था मजबूत बनेगी’
अपने पत्र में अन्ना हजारे ने कहा कि यदि किसी मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित मंत्री का इस्तीफा लिया जाता है तो इससे सरकार कमजोर नहीं होती, बल्कि शासन व्यवस्था में जवाबदेही की संस्कृति मजबूत होती है। उनका कहना है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय होने से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलती है।
पेपर लीक, भर्ती में देरी और बेरोजगारी पर चिंता
अन्ना हजारे ने कहा कि देश के लाखों युवा लगातार परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बढ़ती बेरोजगारी जैसी समस्याओं से परेशान हैं। उन्होंने इन मुद्दों को केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उनके मुताबिक, जब भी कोई बड़ा विवाद सामने आता है तो अक्सर निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई होती है, जबकि नीति स्तर पर जवाबदेही तय नहीं हो पाती। इस स्थिति में सुधार के लिए पारदर्शी और जिम्मेदार व्यवस्था जरूरी है।
छात्र आंदोलन को मिला एक और बड़ा समर्थन
अन्ना हजारे का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब परीक्षा प्रणाली को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। उनका कहना है कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार युवाओं की बात कितनी गंभीरता से सुनती है। उन्होंने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने, संवाद को प्राथमिकता देने और छात्रों के भविष्य को केंद्र में रखकर समाधान निकालने की अपील की।