PM मोदी की तीन देशों की यात्रा: इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरे से भारत को क्या मिला?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा को भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दौरे के दौरान रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। साथ ही भारत की वैश्विक कूटनीतिक मौजूदगी को भी मजबूती मिलने की बात सामने आई।
इंडोनेशिया में सम्मान और रणनीतिक साझेदारी पर जोर
इंडोनेशिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्ण’ से सम्मानित किया गया। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। मलक्का जलडमरूमध्य क्षेत्र में सामरिक सहयोग को मजबूत करने पर भी दोनों पक्षों ने जोर दिया। इस दौरान दोनों देशों के नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा, ऊर्जा और तकनीक पर बढ़ा सहयोग
ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए। नागरिक परमाणु सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और रक्षा सहयोग से जुड़े विषयों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। इन समझौतों को दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों के लिए अहम माना जा रहा है।
न्यूजीलैंड यात्रा में व्यापार और लोगों के बीच संबंधों पर फोकस
करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा को ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस दौरान दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई। शिक्षा, कृषि, नवाचार और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों की भूमिका की सराहना करते हुए दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
इंडो-पैसिफिक नीति और वैश्विक कूटनीति को मिली मजबूती
विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा केवल द्विपक्षीय समझौतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति, एक्ट ईस्ट नीति और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। रक्षा, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग से भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।