पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, टिप्पणी के बाद गहलोत ने सरकार पर बोला हमला
राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि जिम्मेदार संस्थाएं चुनाव नहीं करा सकतीं तो अदालत जज नियुक्त कर चुनाव कराने पर भी विचार कर सकती है। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए इसे प्रशासनिक विफलता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।
हाईकोर्ट ने चुनाव में देरी पर जताई नाराजगी
राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के लंबित चुनावों की सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी पर असंतोष व्यक्त किया। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि यदि निर्वाचन से जुड़ी एजेंसियां समय पर चुनाव कराने में सक्षम नहीं हैं तो अदालत वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव अनिश्चितकाल तक टाले नहीं जा सकते और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अशोक गहलोत ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया मंच X पर राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि सरकार के लिए इससे अधिक शर्मनाक स्थिति क्या हो सकती है कि अदालत को ऐसी टिप्पणी करनी पड़े। गहलोत ने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता बताते हुए आरोप लगाया कि पंचायत और निकाय चुनावों में जानबूझकर देरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समय पर पूरा करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
आरक्षण संबंधी जानकारी नहीं मिलने पर भी उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने अपने बयान में राज्य निर्वाचन आयोग के उस पक्ष का भी उल्लेख किया, जिसमें आयोग ने अदालत को बताया कि पंचायती राज विभाग को कई बार पत्र लिखने के बावजूद अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिला आरक्षण से जुड़ी आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। गहलोत ने आरोप लगाया कि इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज पर असर पड़ा। हालांकि इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
कोर्ट ने सरकार और आयोग को दिए सख्त निर्देश
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को आगामी 20 जुलाई तक चुनाव कार्यक्रम का स्पष्ट रोडमैप पेश करने के निर्देश दिए। अदालत ने OBC आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने, आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी करने और चुनाव से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का आदेश भी दिया। अदालत ने संकेत दिया कि चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बढ़ी हलचल
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद राजस्थान की राजनीति में पंचायत और निकाय चुनावों का मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, जबकि चुनाव कार्यक्रम को लेकर अब सभी की नजर आगामी सुनवाई और राज्य सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले रोडमैप पर टिकी है। अदालत के निर्देशों के बाद आने वाले दिनों में चुनाव प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं।