राजस्थान में NEET अभ्यर्थी की मौत से शोक, परीक्षा परिणाम को लेकर तनाव की बात; पुलिस जांच में जुटी
राजस्थान के अलवर जिले के बहरोड़ में 19 वर्षीय NEET अभ्यर्थी की मौत का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार छात्रा हाल ही में हुई NEET परीक्षा के परिणाम को लेकर तनाव में थी। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की, पोस्टमार्टम करवाया और मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
घर में मिली छात्रा, अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
पुलिस के अनुसार, बहरोड़ की इंदिरा कॉलोनी निवासी कामाक्षी के परिजनों ने घटना की सूचना दी। परिवार के मुताबिक, मंगलवार दोपहर छात्रा की मां, जो सरकारी शिक्षिका हैं, घर पहुंचीं तो बेटी अचेत अवस्था में मिली। इसके बाद परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम के बाद मामले की जांच शुरू कर दी।
डॉक्टर बनने का सपना, परीक्षा को लेकर थी चिंतित
परिजनों ने पुलिस को बताया कि कामाक्षी ने हाल ही में NEET परीक्षा दी थी और वह अपने प्रदर्शन को लेकर चिंतित थी। परिवार के अनुसार, उसका सपना डॉक्टर बनने का था और वह इसी लक्ष्य के लिए लंबे समय से तैयारी कर रही थी। पुलिस ने बताया कि परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं तथा घटना के कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और पुलिस ने किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है।
नेता प्रतिपक्ष ने जताया शोक
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए दिवंगत छात्रा को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि परिवार को इस कठिन समय में संबल और शक्ति मिले।
प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिन्होंने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा का परिणाम जीवन का अंतिम पैमाना नहीं है और तनाव की स्थिति में समय रहते परिवार, मित्रों, शिक्षकों या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सहायता लेना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
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