#राज्य-शहर

अलवर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन 14वें दिन भी जारी, कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर गेट पर चस्पा किया ज्ञापन

अलवर में विभिन्न मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन लगातार 14वें दिन भी जारी रहा। मंगलवार को सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मिनी सचिवालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर से मुलाकात की मांग की। कलेक्टर के नहीं मिलने पर प्रदर्शनकारियों ने अपना ज्ञापन मुख्य गेट पर ही चस्पा कर विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।

मिनी सचिवालय में जुटीं सैकड़ों कार्यकर्ता, सरकार के खिलाफ लगाए नारे

मंगलवार सुबह करीब 10 बजे जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मिनी सचिवालय पहुंचीं। बड़ी संख्या में महिलाओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। दोपहर करीब 12:30 बजे तक चला प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।

कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर गेट पर चस्पा किया ज्ञापन

प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग जिला कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने की थी। हालांकि कलेक्टर के उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्यकर्ताओं की मुलाकात नहीं हो सकी। इससे नाराज महिलाओं ने अपना ज्ञापन मिनी सचिवालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही चस्पा कर दिया। उनका कहना था कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है और बार-बार अनदेखी की जा रही है।

राज्य कर्मचारी का दर्जा और बढ़े मानदेय की प्रमुख मांग

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम ₹25 हजार मासिक मानदेय तय करने और सेवानिवृत्ति के समय ₹10 लाख की आर्थिक सहायता देने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि वे सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का काम करती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय मिलता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा उनका अधिकार है।

17 वर्षों से उठ रही मांगें, अब तक नहीं मिला समाधान

यूनियन अध्यक्ष लतेश शर्मा ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगें पिछले 17 वर्षों से लगातार उठाई जा रही हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने इन्हें गंभीरता से लागू नहीं किया। उन्होंने बताया कि पहले मानदेय में नियमित बढ़ोतरी होती थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया लगभग रुक गई है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा मानदेय में परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।

राजनीतिक समर्थन भी मिला, केंद्रों का काम रहा प्रभावित

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता लिली यादव और पूर्व जिला अध्यक्ष कमलेश सैनी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला कलेक्टर होने के बावजूद प्रदर्शनकारी महिलाओं से मुलाकात नहीं करना निराशाजनक है। दूसरी ओर आंदोलन के कारण जिले के कई ग्रामीण और शहरी आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन प्रभावित रहा, जिससे पोषण और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों पर भी असर पड़ा। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *