‘भारत-इजरायल की दोस्ती से सबक ले जापान’, विशेषज्ञ की सलाह; तुर्की को बताया भविष्य का रणनीतिक साझेदार
भारत और इजरायल के मजबूत होते रिश्ते अब वैश्विक रणनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन गए हैं। एक जापानी रणनीतिक विशेषज्ञ ने टोक्यो को सलाह दी है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच उसे भी भारत-इजरायल जैसी बहुस्तरीय साझेदारी की नीति अपनानी चाहिए। विशेषज्ञ का मानना है कि अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय जापान को नए रणनीतिक साझेदार तैयार करने चाहिए, जिनमें तुर्की एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है।
भारत-इजरायल संबंधों को मिला नई रणनीतिक मिसाल का दर्जा
हाल के वर्षों में भारत और इजरायल के बीच रक्षा, तकनीक, कृषि, साइबर सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। इसी संदर्भ में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल में भारत के प्रति सकारात्मक टिप्पणी करते हुए दोनों देशों के रिश्तों की अहमियत रेखांकित की। उन्होंने कहा कि इजरायल को केवल अमेरिका का ही नहीं, बल्कि भारत जैसे बड़े और भरोसेमंद साझेदार का भी मजबूत समर्थन प्राप्त है। इस बयान को दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक विश्वास का संकेत माना जा रहा है।
जापानी विशेषज्ञ ने अमेरिका पर निर्भरता कम करने की दी सलाह
हडसन इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो केन मोरियासु ने अपने एक लेख में कहा कि एशिया में अमेरिका के सहयोगी देशों को भविष्य की रणनीति पर नए सिरे से विचार करना चाहिए। उनके अनुसार बदलते वैश्विक माहौल में केवल एक सुरक्षा साझेदार पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस और थाईलैंड जैसे देशों को अपने रणनीतिक संबंधों का दायरा बढ़ाना चाहिए, ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके।
तुर्की को बताया जापान के लिए संभावित रणनीतिक सहयोगी
केन मोरियासु ने अपने विश्लेषण में तुर्की को जापान का संभावित भविष्य का रणनीतिक साझेदार बताया। उनके अनुसार दोनों देश भौगोलिक रूप से अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित होने के बावजूद कई साझा रणनीतिक हित रखते हैं। उन्होंने कहा कि तुर्की यूरोप, मध्य पूर्व और मध्य एशिया को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है, जबकि जापान एशिया-प्रशांत क्षेत्र की प्रमुख आर्थिक और तकनीकी शक्ति है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग भविष्य में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है।
अमेरिका के बदलते रुख ने बढ़ाई सहयोगियों की चिंता
विशेषज्ञ ने अपने लेख में यह भी कहा कि हाल के वर्षों में अमेरिका की विदेश नीति में आए बदलावों ने उसके सहयोगी देशों के बीच चिंता बढ़ाई है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि अमेरिका अपने सबसे करीबी सहयोगियों के साथ भी पहले जैसी प्रतिबद्धता नहीं दिखाता, तो अन्य देशों को वैकल्पिक रणनीतिक साझेदारों की तलाश करनी चाहिए। इसी कारण जापान जैसे देशों को अपनी विदेश नीति में अधिक संतुलन और विविधता लाने की जरूरत महसूस हो रही है।
भारत को बताया इजरायल का भरोसेमंद साझेदार
विश्लेषण में यह भी कहा गया कि इजरायल ने लंबे समय से ऐसे देशों के साथ मजबूत संबंध विकसित करने की कोशिश की है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके लिए विश्वसनीय सहयोगी बन सकें। इस संदर्भ में भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार के रूप में देखा गया है। दोनों देशों के बीच रक्षा खरीद, संयुक्त अनुसंधान, सुरक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी लगातार बढ़ी है। विशेषज्ञ का मानना है कि यही मॉडल अन्य देशों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
भू-राजनीति में तुर्की की बढ़ती भूमिका पर जोर
लेख में तुर्की की भौगोलिक स्थिति को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताया गया है। यूरोप, मध्य पूर्व और मध्य एशिया के संगम पर स्थित होने के कारण तुर्की ऊर्जा, व्यापार और परिवहन मार्गों के लिहाज से बेहद अहम देश माना जाता है। विशेषज्ञ का कहना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और वैकल्पिक व्यापार मार्गों की बढ़ती जरूरत के बीच तुर्की का रणनीतिक महत्व और बढ़ सकता है। यही वजह है कि कई देश भविष्य की कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति में तुर्की को महत्वपूर्ण स्थान दे रहे हैं।