Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 याचिकाएं खारिज कीं, अभिनेता को नहीं मिली राहत
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने दोनों की 21 याचिकाएं खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले और सजा को बरकरार रखा। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोनों के रवैये पर भी कड़ी टिप्पणी की और कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किए गए वादों का सम्मान करना हर पक्ष की जिम्मेदारी है।
21 याचिकाएं खारिज, सजा बरकरार
दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव और उनकी पत्नी की ओर से दायर कुल 21 याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि दोनों को पहले भी कई अवसर दिए गए थे, लेकिन उन्होंने अदालत के समक्ष किए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया। ऐसे में दोषसिद्धि और सजा में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य केवल राहत देना नहीं, बल्कि कानून का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करना भी है।
कोर्ट ने रवैये पर जताई सख्त नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शुरुआत से ही दोषसिद्धि को चुनौती देने के पर्याप्त आधार नहीं थे। इसके बावजूद समझौते की संभावना देखते हुए समय-समय पर राहत दी गई। न्यायालय के अनुसार, बार-बार समय मांगने और भुगतान का भरोसा देने के बाद भी वादे पूरे नहीं किए गए। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गंभीर लापरवाही माना और कहा कि अदालत में दिए गए आश्वासनों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती।
‘पैसे नहीं दूंगा’ बयान पर अदालत की टिप्पणी
फैसले में अदालत ने उल्लेख किया कि सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने कथित तौर पर कहा कि वह शिकायतकर्ता को भुगतान करने के बजाय जेल जाना पसंद करेंगे। इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जेल जाना किसी की व्यक्तिगत पसंद हो सकती है, लेकिन इससे कानूनी दायित्व समाप्त नहीं हो जाते। न्यायालय ने यह भी कहा कि कानून किसी फिल्म की पटकथा नहीं है, जिसे परिस्थितियों के अनुसार बदला जा सके।
देरी माफ करने की मांग भी ठुकराई
राजपाल यादव और उनकी पत्नी ने अपील दाखिल करने में हुई देरी के लिए अपने पूर्व वकीलों की गलत सलाह को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने अदालत से देरी को माफ कर अपील स्वीकार करने का अनुरोध किया। हालांकि हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद कहा कि इस दावे के समर्थन में पर्याप्त तथ्य मौजूद नहीं हैं। इसी आधार पर देरी माफी की सभी अर्जियां भी खारिज कर दी गईं।
‘अता पता लापता’ फिल्म से जुड़ा है पूरा विवाद
यह मामला फिल्म ‘अता पता लापता’ के वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, फिल्म निर्माण के लिए एक कंपनी ने करीब पांच करोड़ रुपये का वित्तीय सहयोग दिया था, जबकि राजपाल यादव और उनकी पत्नी इस समझौते में गारंटर थे। भुगतान संबंधी विवाद और कई चेक बाउंस होने के बाद शिकायतकर्ता ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत मामले दर्ज कराए थे। इन्हीं मामलों में निचली अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया था, जिसे अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा।