अमेरिका से साझेदारी, BRICS-SCO से भी मजबूत रिश्ते; भारत की ‘रणनीतिक संतुलन’ नीति पर बड़ा दावा
भारत की विदेश नीति इन दिनों वैश्विक रणनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। पूर्व भारतीय राजनयिक कंवल सिब्बल का मानना है कि भारत अब ऐसी कूटनीतिक नीति पर आगे बढ़ रहा है, जिसमें अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ सहयोग भी जारी रहेगा और BRICS व SCO जैसे गैर-पश्चिमी मंचों के साथ भी रिश्ते मजबूत किए जाएंगे। उनके अनुसार, भारत किसी एक धड़े पर निर्भर रहने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की रणनीति अपना रहा है।
भारत चाहता है साझेदारी, लेकिन निर्भरता नहीं
पूर्व राजदूत कंवल सिब्बल ने कहा कि भारत अमेरिका के साथ मजबूत और लाभकारी संबंध चाहता है, लेकिन वह किसी भी स्थिति में रणनीतिक निर्भरता स्वीकार नहीं करना चाहता। उनके मुताबिक भारत पश्चिमी देशों के साथ सहयोग को महत्व देता है, लेकिन किसी भी प्रकार के राजनीतिक या कूटनीतिक दबाव के पक्ष में नहीं है। यही कारण है कि भारत अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र निर्णय लेने की परंपरा को लगातार बनाए हुए है।
भारत और अमेरिका की सोच में मूलभूत अंतर
सिब्बल के अनुसार भारत और अमेरिका की विदेश नीति की प्राथमिकताएं पूरी तरह समान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत सैन्य गठबंधनों से दूरी बनाए रखते हुए अधिक से अधिक देशों के साथ संतुलित संबंध विकसित करना चाहता है। दूसरी ओर अमेरिका अपनी वैश्विक रणनीति में लोकतंत्र, मानवाधिकार और बाजार आधारित व्यवस्था जैसे सिद्धांतों को प्रमुख आधार बनाता है। यही वैचारिक अंतर कई बार दोनों देशों के बीच मतभेद की वजह भी बनता है।
BRICS और SCO क्यों हैं भारत के लिए अहम?
पूर्व राजनयिक का कहना है कि भारत का BRICS और SCO जैसे मंचों में सक्रिय रहना उसकी संतुलित विदेश नीति का हिस्सा है। उनके अनुसार ये संगठन वैश्विक सहयोग के वैकल्पिक मंच उपलब्ध कराते हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में पश्चिमी देशों के प्रभाव पर अत्यधिक निर्भरता कम करने में मदद करते हैं। भारत इन मंचों के जरिए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी अपनी भूमिका निभा रहा है।
ट्रंप प्रशासन के दौर का भी किया जिक्र
कंवल सिब्बल ने कहा कि अमेरिका के साथ रिश्तों में कई व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आई हैं। उन्होंने टैरिफ विवाद, रूस के साथ भारत के संबंधों पर अमेरिकी दबाव, पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी नीति और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के संबंधों में मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। इसलिए भारत को हर परिस्थिति में अपने हितों का संतुलन बनाए रखना होगा।
राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर रखने की सलाह
सिब्बल का मानना है कि भारत को अमेरिका के साथ संवाद और सहयोग जारी रखना चाहिए, लेकिन किसी भी साझेदारी की कीमत पर अपने मूल राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वतंत्र विदेश नीति है, जो उसे अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के साथ समानांतर संबंध बनाए रखने की क्षमता देती है। यही संतुलित दृष्टिकोण आने वाले वर्षों में भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत कर सकता है।