दुर्ग के 66 सरकारी स्कूलों के जर्जर भवन होंगे ध्वस्त, प्रशासन का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। दुर्ग, धमधा और पाटन विकासखंड के 66 सरकारी स्कूलों के जर्जर और असुरक्षित भवनों को ध्वस्त करने की मंजूरी दे दी गई है। प्रशासन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और अन्य जर्जर भवनों का सर्वे भी जारी है।
कलेक्टर ने दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश
जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जिला शिक्षा अधिकारी और लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट के आधार पर 66 स्कूल भवनों को उपयोग के लिए असुरक्षित मानते हुए उन्हें ध्वस्त करने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन ने संबंधित विभागों को जल्द से जल्द कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। साथ ही अन्य सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों का भी निरीक्षण कराया जा रहा है और रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
तीन विकासखंडों के स्कूलों में होगी कार्रवाई
प्रशासनिक आदेश के अनुसार दुर्ग विकासखंड के 8, धमधा के 26 और पाटन विकासखंड के 32 सरकारी स्कूलों के जर्जर भवन, कक्ष, बरामदे और अन्य असुरक्षित हिस्सों को हटाया जाएगा। इनमें कई ऐसे भवन शामिल हैं जिनमें लंबे समय से पढ़ाई संचालित हो रही थी और किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी हुई थी। प्रशासन अब इन भवनों को हटाकर सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगा।
बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। जर्जर भवनों को हटाने के साथ-साथ वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने और सुरक्षित परिसरों में शिक्षण कार्य जारी रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका को समाप्त करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
अन्य जर्जर स्कूल भवनों का भी होगा सर्वे
प्रशासन ने बताया कि जिले के अन्य सरकारी स्कूलों के भवनों की स्थिति का भी लगातार आकलन किया जा रहा है। जहां भी भवन उपयोग के लिए असुरक्षित पाए जाएंगे, उन्हें नियमानुसार निष्प्रयोज्य घोषित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि समय पर सर्वे और मरम्मत अथवा ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई से भविष्य में संभावित हादसों को रोका जा सकेगा और विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी।