अमेरिका-ईरान संघर्ष फिर तेज: दो दिनों में 14 मौतें, 47 घायल अब भी अस्पताल में भर्ती
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। ईरान का दावा है कि पिछले दो दिनों में अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। बढ़ते टकराव के बीच खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं भी तेज हो गई हैं। वहीं, कतर ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है।
ईरान का दावा- दो दिनों में 14 लोगों की मौत
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो दिनों में देश के विभिन्न प्रांतों पर हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की जान गई है। मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपूर ने बताया कि इन हमलों में कुल 78 लोग घायल हुए, जिनमें से 47 अब भी अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। शेष घायलों को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई का दावा
ईरानी सेना ने कहा है कि उसने अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। सेना के अनुसार, कतर, बहरीन और कुवैत में ड्रोन हमले किए गए, जिनमें कथित तौर पर कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों को लक्ष्य बनाया गया। हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित देशों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
समुद्री सुरक्षा और व्यापार पर बढ़ी चिंता
लगातार बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह इलाका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल आपूर्ति, शिपिंग और वैश्विक बाजारों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
कतर ने कूटनीतिक समाधान पर दिया जोर
कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत कर समुद्री जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर चिंता जताई। कतर ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा हैं। साथ ही सभी पक्षों से संवाद, संयम और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने की अपील की गई।
क्षेत्रीय शांति पर मंडरा रहा संकट
मौजूदा हालात ने पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। क्षेत्रीय देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी हालात पर नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष जल्द बातचीत की राह नहीं अपनाते, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।