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ट्रंप के तंज पर बेल्जियम के रक्षा मंत्री का मेलोनी को समर्थन, बोले- ‘वो क्वीन हैं, उन्हें अकेला छोड़ दें’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के बीच सोशल मीडिया पर बढ़ी बयानबाजी के बीच बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन ने मेलोनी का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने यूरोपीय नेताओं से अपील की कि वे मेलोनी को निशाना न बनाएं और साथ ही अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध बनाए रखें। फ्रैंकेन का कहना है कि आने वाले वर्षों में यूरोप की सुरक्षा के लिए अमेरिका का सहयोग बेहद अहम रहेगा।

ट्रंप की पोस्ट के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के बीच हालिया बयानबाजी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर मेलोनी को लेकर ‘रेस्ट्रेनिंग ऑर्डर’ संबंधी टिप्पणी की, जिसके बाद इस मुद्दे पर कई यूरोपीय नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। इसी कड़ी में बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन ने मेलोनी का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें अनावश्यक रूप से राजनीतिक निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके बयान ने यूरोप के भीतर चल रही राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है।

थियो फ्रैंकेन बोले- मेलोनी यूरोप की मजबूत नेता हैं

बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन ने कहा कि जियोर्जिया मेलोनी यूरोप के सेंटर-राइट राजनीतिक धड़े की सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि मेलोनी को विवादों में घसीटने के बजाय उनके नेतृत्व का सम्मान किया जाना चाहिए। फ्रैंकेन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “वह क्वीन हैं, उन्हें अकेला छोड़ दीजिए।” उनके अनुसार, यूरोप की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में मेलोनी की भूमिका महत्वपूर्ण है और उन पर व्यक्तिगत टिप्पणियां उचित नहीं हैं।

यूरोप को अमेरिका के साथ मजबूत रिश्ते रखने की सलाह

फ्रैंकेन ने अपने बयान में यह भी कहा कि यूरोप को अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने के प्रयास जारी रखने चाहिए, लेकिन साथ ही अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी कमजोर नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि अगले पांच से दस वर्षों तक यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था काफी हद तक अमेरिकी सैन्य सहयोग पर निर्भर रहेगी। ऐसे में ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को मजबूत बनाए रखना यूरोपीय देशों के हित में है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सहयोगी देशों के बीच संवाद और साझेदारी बनी रहनी चाहिए।

G7 सम्मेलन के बाद शुरू हुआ विवाद

यह विवाद जून में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के बाद और बढ़ गया। ट्रंप ने दावा किया था कि मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई थी, जबकि इटली की प्रधानमंत्री ने इस दावे को खारिज कर दिया। इसके बाद ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट ने एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी। फ्रैंकेन ने इस पूरे विवाद पर हैरानी जताते हुए कहा कि दोनों नेताओं की कई मुद्दों पर विचारधारा समान मानी जाती है, इसलिए एक तस्वीर या सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर इतना बड़ा विवाद होना समझ से परे है।

राजनीतिक मतभेदों के बीच बढ़ी कूटनीतिक बहस

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप और मेलोनी के बीच हालिया बयानबाजी केवल व्यक्तिगत टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यूरोप-अमेरिका संबंधों और पश्चिमी देशों की बदलती राजनीतिक दिशा को भी दर्शाती है। आने वाले समय में नाटो, यूरोपीय सुरक्षा और अमेरिका-यूरोप सहयोग जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के रुख पर दुनिया की नजर बनी रहेगी। वहीं, फ्रैंकेन का बयान इस बात का संकेत देता है कि यूरोप के कई नेता अब भी अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता मानते हैं।

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