फर्जी FMG सर्टिफिकेट मामले में एक और डॉक्टर गिरफ्तार, SOG की कार्रवाई तेज
राजस्थान में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई कर लौटे छात्रों के फर्जी FMG सर्टिफिकेट मामले में विशेष जांच दल (SOG) ने एक और डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने भरतपुर निवासी 27 वर्षीय चरण सिंह को पकड़ा है। आरोप है कि कजाकिस्तान से MBBS करने के बाद FMG स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाने पर उसने करीब 24 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करवाया। इसी दस्तावेज के आधार पर उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल से इंटर्नशिप, प्रोविजनल और स्थायी रजिस्ट्रेशन हासिल कर लिया। मामले में अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
कजाकिस्तान से MBBS के बाद नहीं पास कर पाया FMG परीक्षा
SOG की जांच के अनुसार, भरतपुर के गोपालगढ़ निवासी चरण सिंह ने वर्ष 2017 से 2022 के बीच कजाकिस्तान के अल्माटी विश्वविद्यालय से MBBS की पढ़ाई की थी। भारत लौटने के बाद डॉक्टर बनने के लिए उसे नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) की ओर से आयोजित FMG स्क्रीनिंग परीक्षा पास करनी थी, लेकिन वह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सका। इसके बाद कथित रूप से उसने गलत रास्ता अपनाया और फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए मेडिकल रजिस्ट्रेशन हासिल करने की कोशिश की।
24 लाख रुपये देकर बनवाया फर्जी FMG प्रमाणपत्र
जांच में सामने आया है कि चरण सिंह ने अपने संपर्क के जरिए करीब 24 लाख रुपये देकर फर्जी FMG पास सर्टिफिकेट तैयार करवाया। इसी प्रमाणपत्र को आधार बनाकर उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में इंटर्नशिप और प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन हासिल किया। बाद में इसी प्रक्रिया के जरिए उसका स्थायी पंजीयन भी हो गया। SOG अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं और कितने अन्य छात्रों ने इस तरीके से मेडिकल रजिस्ट्रेशन प्राप्त किया।
फर्जी प्रमाणपत्र नेटवर्क में कई लोगों की भूमिका सामने आई
SOG अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे मामले में विदेश से मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने वाले कई छात्रों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच में राजस्थान मेडिकल काउंसिल से जुड़े कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि अब तक करीब 100 संदिग्ध लोगों की पहचान की जा चुकी है। इस मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
20 से 30 लाख रुपये तक वसूलने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, फर्जी FMG सर्टिफिकेट तैयार करने वाले गिरोह ने प्रत्येक व्यक्ति से लाखों रुपये वसूले। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क में शामिल लोगों ने फर्जी प्रमाणपत्र और मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर करीब 20 से 30 लाख रुपये तक लिए। SOG अब आरोपी डॉक्टर से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला, जांच जारी
फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र के जरिए डॉक्टर के रूप में पंजीयन हासिल करने का मामला मरीजों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। SOG का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश किया। जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल जांच लगातार जारी है।