जंतर-मंतर पर बढ़ा विवाद, वालंटियर से कथित बदसलूकी के आरोपों पर मचा सियासी बवाल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान एक वालंटियर के साथ कथित बदसलूकी का मामला सामने आने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। ‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन स्थल पर लगी अस्थायी लाइब्रेरी में किताबें बांट रहे एक स्वयंसेवक के साथ दिल्ली पुलिस ने दुर्व्यवहार किया। हालांकि, इस दावे की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से भी इस संबंध में विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
वालंटियर के साथ कथित घटना पर उठे सवाल
सीजेपी का दावा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए बनाई गई लाइब्रेरी में एक वालंटियर लोगों को छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और इतिहास से जुड़ी पुस्तकें उपलब्ध करा रहा था। संगठन के अनुसार, इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उसके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया। घटना के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और कई लोगों ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। हालांकि, अब तक उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रदर्शन के बीच बढ़ा तनाव
जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर प्रदर्शन जारी हैं। इसी क्रम में लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आंदोलन भी चर्चा में है। विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता भी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं। ऐसे माहौल में वालंटियर के साथ कथित घटना की खबर सामने आने से प्रदर्शन स्थल पर तनाव और बढ़ गया तथा प्रदर्शनकारी संगठनों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
घटना को लेकर तस्वीर अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं
घटना के बाद कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गईं, जिनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। हालांकि, इन दृश्यों से यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वालंटियर के साथ वास्तव में क्या हुआ। स्वतंत्र रूप से उपलब्ध साक्ष्यों के अभाव में मारपीट या बल प्रयोग के दावों की पुष्टि फिलहाल नहीं की जा सकती। जांच और आधिकारिक जानकारी के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
पुलिस की प्रतिक्रिया का इंतजार
घटना को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। आमतौर पर पुलिस का कहना होता है कि प्रदर्शन स्थलों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाती है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी संगठन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब इस मामले में आगे आने वाली आधिकारिक रिपोर्ट और जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि किसी स्तर पर कोई अनुचित व्यवहार हुआ है तो उसके लिए क्या कार्रवाई की जाएगी।