#क्राइम #राज्य-शहर

पत्नी की हत्या के मामले में पति को उम्रकैद, अदालत ने साजिश मानते हुए सुनाया फैसला

मध्य प्रदेश के इंदौर में बहुचर्चित शिवानी हत्याकांड में जिला अदालत ने आरोपी पति अमितेश उर्फ शालू पटेरिया को पत्नी की हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने साक्ष्य मिटाने और संरक्षित प्रजाति के कोबरा की हत्या से जुड़े अपराधों में भी दोषसिद्धि दर्ज की। अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच और 28 गवाहों के आधार पर अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखा।

वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की जांच, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाण अदालत में प्रस्तुत किए। अतिरिक्त लोक अभियोजक के अनुसार इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि हत्या सुनियोजित तरीके से की गई थी। अभियोजन ने यह भी कहा कि विवाह के बाद से मृतका को कथित रूप से दहेज और आर्थिक मांगों को लेकर प्रताड़ित किया जाता था। मामले में आरोपी के पिता और एक अन्य महिला को भी आरोपित बनाया गया था।

हत्या को हादसा दिखाने की कथित कोशिश

अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, 1 दिसंबर 2019 को आरोपी ने पत्नी शिवानी की तकिये से मुंह दबाकर हत्या की। इसके बाद घटना को सर्पदंश से हुई मौत साबित करने के उद्देश्य से कथित तौर पर कोबरा सांप का इस्तेमाल किया गया। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि महिला की मौत दम घुटने के कारण हुई थी, न कि सांप के काटने से। इस चिकित्सकीय निष्कर्ष ने जांच की दिशा बदल दी और पूरे मामले का खुलासा होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजस्थान से कोबरा लाने का दावा जांच में आया सामने

जांच अधिकारी ने अदालत में दिए अपने बयान में बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित रूप से स्वीकार किया था कि उसने राजस्थान के अलवर रेलवे स्टेशन के पास एक सपेरे से लगभग पांच हजार रुपये में कोबरा खरीदा था। अभियोजन के अनुसार इसी सांप का उपयोग घटना को दुर्घटना का रूप देने के प्रयास में किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान मृतका के मायके पक्ष के गवाहों ने भी दंपति के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद और पारिवारिक तनाव का उल्लेख अपने बयानों में किया।

कोबरा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी बनी अहम साक्ष्य

इस मामले की विशेष बात यह रही कि अदालत में महिला की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ कोबरा सांप की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की गई। चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक ने भी अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से मृत कोबरा, बिस्तर और अन्य सामग्री बरामद हुई थी। अदालत ने अपने फैसले में माना कि आरोपी ने कथित तौर पर घटना के बाद कोबरा को भी मार दिया था, जिसके चलते संरक्षित वन्यजीव की हत्या का अपराध भी सिद्ध हुआ।

28 गवाहों और फॉरेंसिक जांच ने मजबूत किया अभियोजन का पक्ष

अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष कुल 28 गवाह पेश किए, जिनमें पुलिस अधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, पोस्टमार्टम बोर्ड के सदस्य और पशु चिकित्सक शामिल थे। इन गवाहों के बयान और वैज्ञानिक जांच रिपोर्टों के आधार पर अदालत ने आरोपी को हत्या, साक्ष्य मिटाने और अन्य संबंधित अपराधों में दोषी ठहराया। अदालत के फैसले के साथ करीब साढ़े छह वर्ष पुराने इस चर्चित मामले का न्यायिक स्तर पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *