Om Puri On Bollywood: ‘अच्छे रोल रिश्तेदारों को, बाकी के हाथ में चाकू’, नेपोटिज्म पर ओम पुरी का पुराना बयान फिर वायरल
दिवंगत अभिनेता ओम पुरी ने एक पुराने इंटरव्यू में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म और रोल के बंटवारे पर खुलकर अपनी राय रखी थी। उन्होंने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की प्रतिभा की तारीफ करते हुए कहा था कि बेहतरीन कलाकारों को अक्सर मजबूत किरदार नहीं मिलते, जबकि अच्छे रोल रिश्तेदारों के हिस्से में चले जाते हैं। उनका यह बयान आज भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
नसीरुद्दीन शाह की तारीफ करते हुए उठाया था मुद्दा
ओम पुरी ने एक पुराने इंटरव्यू में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की अभिनय क्षमता की जमकर सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि नसीरुद्दीन शाह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। उन्होंने ‘मॉनसून वेडिंग’ में उनके अभिनय का जिक्र करते हुए बताया था कि विदेशी दर्शकों और फिल्म समीक्षकों ने भी उनकी खूब प्रशंसा की थी।
‘150 फिल्में करने के बाद भी नहीं मिले बेहतरीन किरदार’
ओम पुरी ने कहा था कि नसीरुद्दीन शाह ने अपने करियर में 150 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें उनकी प्रतिभा के अनुरूप मौके बहुत कम मिले। उनका कहना था कि फिल्म इंडस्ट्री प्रतिभाशाली कलाकारों को काम तो देती है, लेकिन महत्वपूर्ण और दमदार किरदार अक्सर अपने परिवार या करीबी लोगों के लिए सुरक्षित रखे जाते हैं।
‘अच्छे रोल रिश्तेदारों को, बाकी को बना देते हैं गुंडा’
इंटरव्यू में ओम पुरी ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि इंडस्ट्री में बेहतरीन भूमिकाएं रिश्तेदारों को मिल जाती हैं, जबकि दूसरे कलाकारों के हाथ में चाकू थमा कर उन्हें गुंडे जैसे किरदार निभाने के लिए छोड़ दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी अभिनेता की असली पहचान उसकी सार्थक फिल्मों से बनती है, न कि केवल व्यावसायिक फिल्मों से।
क्लासिक फिल्मों का किया था जिक्र
ओम पुरी ने नसीरुद्दीन शाह को उनकी यादगार फिल्मों की याद दिलाते हुए कहा था कि ‘स्पर्श’, ‘मंथन’, ‘आक्रोश’ और ‘जाने भी दो यारों’ जैसी फिल्मों ने उन्हें विश्वस्तरीय अभिनेताओं की कतार में खड़ा किया। उनके मुताबिक, ऐसे किरदार ही किसी कलाकार की असली विरासत बनते हैं।
एनएसडी से शुरू हुई थी दोनों की दोस्ती
ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह की दोस्ती की शुरुआत नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के दिनों में हुई थी। दोनों ने आगे चलकर ‘आक्रोश’, ‘स्पर्श’, ‘जाने भी दो यारों’, ‘पार’ और ‘मंडी’ जैसी कई चर्चित फिल्मों में साथ काम किया। हालांकि, समय के साथ दोनों के रिश्तों में कुछ दूरी भी आई, लेकिन एक-दूसरे की प्रतिभा के प्रति सम्मान हमेशा बना रहा।
आज भी चर्चा में रहता है ओम पुरी का बयान
6 जनवरी 2017 को ओम पुरी का निधन हो गया था, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में प्रतिभा, अवसर और नेपोटिज्म को लेकर दिया गया उनका यह बयान आज भी समय-समय पर चर्चा में आ जाता है। सोशल मीडिया पर यह इंटरव्यू फिर वायरल होने के बाद एक बार फिर बॉलीवुड में अवसरों की समानता पर बहस तेज हो गई है।