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सीएम योगी और गोरखनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी, 24 घंटे में नाबालिग हिरासत में

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गोरखनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने 24 घंटे के भीतर एक नाबालिग को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, धमकी भरा कॉल आपातकालीन सेवा 112 पर किया गया था। जांच में सामने आया कि कॉल कथित तौर पर आरोपी ने अपनी दादी के मोबाइल फोन से किया था। मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई की।

112 हेल्पलाइन पर आई धमकी के बाद सक्रिय हुई पुलिस

पुलिस के अनुसार, सोमवार देर रात आपातकालीन हेल्पलाइन 112 पर एक कॉल कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गोरखनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और सर्विलांस टीम सक्रिय हो गई। तकनीकी जांच और कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने कॉल करने वाले की पहचान कर उसे 24 घंटे के भीतर कुशीनगर जिले से हिरासत में ले लिया। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच की।

दादी के मोबाइल से किए जाने का दावा

पुलिस जांच में सामने आया कि धमकी देने के लिए जिस मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया, वह आरोपी की बुजुर्ग दादी का था। अधिकारियों के अनुसार, किशोर ने कथित तौर पर अंधेरे में टॉर्च जलाने का बहाना बनाकर दादी से फोन लिया और उसी फोन से 112 पर कॉल कर धमकी दी। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि परिवार को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि फोन का इस्तेमाल इस उद्देश्य से किया जाएगा। पुलिस ने मामले में परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की।

जांच में नाबालिग होने की बात आई सामने

पुलिस के मुताबिक हिरासत में लिया गया व्यक्ति 15 वर्षीय नाबालिग है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान यह जानकारी मिली कि वह मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है और उसे नशे की लत भी है। पुलिस के अनुसार, किशोर अपनी दादी के साथ रहता है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के अनुरूप की गई।

पहले भी धमकी देने का मामला आने का दावा

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित नाबालिग का नाम वर्ष 2025 में अयोध्या को बम से उड़ाने की धमकी देने के एक मामले में भी सामने आया था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि दोनों घटनाओं के बीच क्या संबंध है और क्या पहले की घटना का रिकॉर्ड वर्तमान जांच से मेल खाता है। सुरक्षा एजेंसियां इस तरह की फर्जी धमकियों को गंभीरता से लेते हुए प्रत्येक मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं।

पूछताछ के बाद परिजनों को सौंपा गया

पुलिस ने बताया कि आरोपी के नाबालिग होने और उसकी मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उससे आवश्यक पूछताछ की गई। इसके बाद किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई गई और उसे उसके परिजनों की देखरेख में सौंप दिया गया। पुलिस ने परिवार को उस पर नजर रखने और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह भी दी है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी प्रकार की धमकी को हल्के में नहीं लिया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहे

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