तीस्ता मेगा प्रोजेक्ट पर चीन के साथ आगे बढ़ेगा बांग्लादेश, भारत की चिंताओं को बताया बेबुनियाद
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह तीस्ता मेगा प्रोजेक्ट को चीन के सहयोग से आगे बढ़ाने के अपने फैसले पर कायम है। सरकार के सूचना एवं प्रसारण सलाहकार जाहिद उर रहमान ने कहा कि यह परियोजना पूरी तरह बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों से जुड़ी है और किसी अन्य देश को इस पर आपत्ति करने की कोई वजह नहीं होनी चाहिए। इस बयान के बाद तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भारत-बांग्लादेश संबंधों और क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों पर नई चर्चा शुरू हो गई है।
तीस्ता परियोजना को सरकार की प्राथमिकता
ढाका में मीडिया से बातचीत के दौरान जाहिद उर रहमान ने कहा कि तीस्ता मेगा प्रोजेक्ट का उद्देश्य नदी प्रबंधन, ड्रेजिंग और जल संरक्षण को बेहतर बनाना है। उनके अनुसार, इस परियोजना के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय सहयोग चीन उपलब्ध करा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने संबंधित एजेंसियों को परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने और इसके क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
भारत की चिंताओं पर बांग्लादेश का जवाब
भारत की संभावित सुरक्षा और रणनीतिक चिंताओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में जाहिद उर रहमान ने कहा कि बांग्लादेश एक संप्रभु राष्ट्र है और उसे अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि किसी देश को सुरक्षा संबंधी कोई चिंता है तो बांग्लादेश उस पर विचार कर सकता है, लेकिन इससे अपनी विकास योजनाओं पर समझौता नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि इस परियोजना का उद्देश्य विकास और जल संसाधन प्रबंधन है।
जल बंटवारे के मुद्दे को भी उठाया
जाहिद उर रहमान ने कहा कि बांग्लादेश तीस्ता के साथ-साथ गंगा और अन्य साझा नदियों के जल बंटवारे में अपने हिस्से की मांग राजनयिक माध्यमों से लगातार उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार साझा नदियों के जल के न्यायसंगत बंटवारे को लेकर अपनी कूटनीतिक कोशिशें जारी रखे हुए है। उनके अनुसार, विकास परियोजनाओं और जल साझेदारी के मुद्दे समानांतर रूप से आगे बढ़ाए जाएंगे।
पूर्व सरकार की नीतियों पर साधा निशाना
बांग्लादेश सरकार के सलाहकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल की नीतियों की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने कई मामलों में राष्ट्रीय हितों की बजाय बाहरी संबंधों को प्राथमिकता दी। मौजूदा सरकार का दावा है कि वह सभी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखते हुए केवल बांग्लादेश के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। हालांकि, इस संबंध में अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी राय है।