Doctors’ Day Special: 71 वर्षीय डॉ. हरी प्रकाश पटेरिया आज भी निभा रहे सेवा का धर्म, गरीब मरीजों का नि:स्वार्थ करते हैं इलाज
राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के अवसर पर सिवनी जिले के छपारा निवासी 71 वर्षीय सेवानिवृत्त शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हरी प्रकाश पटेरिया सेवा और समर्पण की मिसाल बने हुए हैं। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे अपने घर पर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों से कई बार फीस तक नहीं लेते और जरूरत पड़ने पर दवाइयों या घर लौटने के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराते हैं। उनका मानना है कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है।
सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी है मरीजों की सेवा
डॉ. हरी प्रकाश पटेरिया ने वर्ष 1983 में शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में सरकारी सेवा शुरू की थी। लंबे समय तक विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएं देने के बाद वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त हुए, लेकिन उन्होंने चिकित्सा सेवा को नहीं छोड़ा। आज भी वे अपने निवास पर मरीजों का इलाज करते हैं। उनके पास आने वाले जरूरतमंद मरीजों को कभी आर्थिक तंगी के कारण लौटाया नहीं जाता। यदि किसी मरीज के पास फीस या दवा खरीदने के लिए पैसे नहीं होते, तो वे अपनी ओर से भी मदद करने का प्रयास करते हैं। यही संवेदनशीलता उन्हें लोगों के बीच विशेष पहचान दिलाती है।
कभी मरीज तक पहुंचना भी था बड़ी चुनौती
डॉ. पटेरिया बताते हैं कि अपने सेवाकाल के शुरुआती वर्षों में चिकित्सा सुविधाएं और परिवहन संसाधन सीमित थे। कई बार गांवों तक पहुंचने के लिए नदी-नाले पार कर छह से सात किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। उस दौर में उल्टी, दस्त और अन्य संक्रामक बीमारियों के मरीजों की संख्या अधिक रहती थी। वे बताते हैं कि इलाज करने के साथ-साथ मरीज तक समय पर पहुंचना भी डॉक्टरों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती थी। कई बार मरीज पूरी तरह स्वस्थ होने तक वे गांव में ही रुककर उपचार करते थे। आज स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है, जिससे मरीज आसानी से अस्पताल तक पहुंच पा रहे हैं।
‘सेवा पहले, पैसा बाद में’ है जीवन का सिद्धांत
डॉ. पटेरिया का मानना है कि चिकित्सा क्षेत्र में आर्थिक जरूरत अपनी जगह है, लेकिन डॉक्टर का पहला कर्तव्य मरीज की जान बचाना और उसे भरोसा देना होना चाहिए। उनके अनुसार, पहले डॉक्टर अपने अनुभव और क्लीनिकल समझ के आधार पर उपचार करते थे, जबकि अब आधुनिक जांचों पर निर्भरता बढ़ गई है। वे यह भी मानते हैं कि डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास का रिश्ता चिकित्सा का सबसे मजबूत आधार है। उनका कहना है कि चिकित्सा सेवा में समर्पण और संवेदनशीलता कभी कम नहीं होनी चाहिए।
परिवार की नई पीढ़ी भी आगे बढ़ा रही सेवा की परंपरा
डॉ. हरी प्रकाश पटेरिया के परिवार में भी चिकित्सा सेवा की परंपरा कायम है। उनकी दो बेटियां और एक बेटा डॉक्टर हैं। वे बताते हैं कि बच्चों ने घर के माहौल और सेवा भावना से प्रेरित होकर चिकित्सा क्षेत्र को अपना करियर चुना। उन्होंने अपने बच्चों को हमेशा यही संदेश दिया कि मरीज के साथ मानवीय व्यवहार और नि:स्वार्थ सेवा डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान होती है। राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे पर उनका जीवन चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणा का उदाहरण बनकर सामने आता है।