होर्मुज में ‘निंजा टेक्निक’ अपना रहे भारत आने वाले जहाज! ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर कम कर रहे खतरा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत आने वाले कई तेल टैंकर और मालवाहक जहाज नई रणनीति अपना रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अनेक जहाज इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से गुजरते समय अपना ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) अस्थायी रूप से बंद कर देते हैं, ताकि उनकी वास्तविक स्थिति सार्वजनिक रूप से दिखाई न दे और संभावित सुरक्षा जोखिम कम किया जा सके।
संघर्ष क्षेत्र में बदला शिपिंग का तरीका
रिपोर्ट के मुताबिक 1 मई से 25 जून के बीच फारस की खाड़ी से भारत आने वाले 73 जहाजों में से 45 ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार करते समय अपना नेविगेशन डेटा प्रसारित नहीं किया। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र में बढ़े सुरक्षा जोखिमों के कारण कई जहाज ऑपरेशनल रणनीति बदल रहे हैं।
क्या होता है AIS ट्रैकिंग सिस्टम?
AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) ऐसा ट्रांसपोंडर है, जो जहाज की लोकेशन, गति और दिशा जैसी जानकारी अन्य जहाजों और समुद्री अधिकारियों तक पहुंचाता है। सामान्य परिस्थितियों में यह समुद्री सुरक्षा के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन संघर्ष वाले इलाकों में कई ऑपरेटर संभावित हमलों या निगरानी से बचने के लिए इसे अस्थायी रूप से बंद कर देते हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव का असर
हालिया अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव और उसके बाद हुए नाजुक संघर्षविराम के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर अनिश्चितता बढ़ी है। यद्यपि दोनों पक्षों के बीच व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बनाए रखने को लेकर शुरुआती सहमति बनी है, लेकिन समुद्री मार्गों के संचालन और नियंत्रण को लेकर मतभेद अभी भी कायम हैं।
दो अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर का इस्तेमाल
वर्तमान स्थिति में जहाज दो अलग-अलग रास्तों का उपयोग कर रहे हैं। एक मार्ग ईरान की निगरानी वाले ट्रैफिक सेपरेशन लेन से होकर गुजरता है, जबकि दूसरा ओमान की ओर स्थित वैकल्पिक समुद्री कॉरिडोर है, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी सुरक्षित विकल्प मानते हैं। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग दोनों मार्गों में बंटी हुई दिखाई दे रही है।
‘डार्क ट्रांजिट’ का बढ़ता चलन
विश्लेषण से पता चलता है कि चाहे जहाज किसी भी मार्ग से गुजरें, कई जहाज ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके ही यात्रा कर रहे हैं। इसे समुद्री क्षेत्र में “डार्क ट्रांजिट” कहा जाता है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक ट्रैकिंग से बचते हुए संवेदनशील इलाके को सुरक्षित तरीके से पार करना होता है।
भारतीय जहाजों की स्थिति
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में भारतीय ध्वज वाले चार जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया। इनमें से दो जहाजों ने AIS ट्रांसपोंडर बंद रखा, जबकि दो अन्य जहाजों ने पूरे सफर के दौरान अपनी लोकेशन प्रसारित करना जारी रखा।
अन्य देशों के जहाज भी अपना रहे यही तरीका
विश्लेषण में पनामा, लाइबेरिया, संयुक्त अरब अमीरात और मार्शल आइलैंड्स में पंजीकृत कई जहाजों की पहचान हुई, जिन्होंने होर्मुज से गुजरते समय अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद रखा। इनमें कुछ जहाज ओमान वाले समुद्री मार्ग से गुजरे, जबकि अन्य ने ईरान की निगरानी वाले कॉरिडोर का उपयोग किया।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर नजर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव या समुद्री गतिविधियों में बदलाव सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।