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ईरान पर फिर भड़के ट्रंप, बोले- नहीं सुधरा तो अस्तित्व पर संकट; हमलों के बाद बढ़ा नए युद्ध का खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच ताजा सैन्य कार्रवाई और तीखी बयानबाजी ने पश्चिम एशिया में नए संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान अपनी गतिविधियों से पीछे नहीं हटता तो उसके अस्तित्व पर भी खतरा आ सकता है। वहीं ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए अमेरिका पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी कूटनीतिक हलचल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर ईरान को लेकर सख्त संदेश जारी किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई की है और यदि तेहरान ने अपना रवैया नहीं बदला तो अमेरिका और अधिक कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति बनने पर ईरान के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उनके इस बयान ने पहले से तनावपूर्ण माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।

ईरान का आरोप- अमेरिका ने तोड़ा समझौता

ईरान ने दावा किया है कि अमेरिकी वायुसेना ने उसके दक्षिणी तटीय क्षेत्र में स्थित निगरानी और सर्विलांस केंद्रों को निशाना बनाया। तेहरान का कहना है कि यह कार्रवाई उस अंतरिम समझौते की भावना के खिलाफ है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच कई महीनों से जारी सैन्य टकराव को समाप्त करना था। ईरानी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अपने वादों का पालन नहीं किया और सैन्य कार्रवाई करके तनाव को दोबारा बढ़ा दिया। ईरान ने चेतावनी दी कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो कूटनीतिक प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो सकती है।

अमेरिका का जवाब- युद्धविराम का सम्मान नहीं किया गया

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने अपने बयान में कहा कि ईरान को युद्धविराम समझौते का पालन करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरानी गतिविधियों और ड्रोन हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई की गई। अमेरिका का दावा है कि इस अभियान में ईरान के कई सामरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। वॉशिंगटन का कहना है कि उसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना और अपने सैन्य हितों की रक्षा करना है।

ईरान का दावा- बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने एक संयुक्त सैन्य अभियान के तहत कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े से जुड़े कई ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। आईआरजीसी के अनुसार यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई। हालांकि इन हमलों से हुए नुकसान और हताहतों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल नहीं हो सकी है। इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

क्या फिर शुरू हो सकती है बड़ी जंग?

लगातार हो रहे हमले, जवाबी कार्रवाई और दोनों देशों के आक्रामक बयानों ने मध्य पूर्व में स्थिरता को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। यदि कूटनीतिक वार्ता पूरी तरह विफल होती है तो क्षेत्र में व्यापक सैन्य संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों पक्ष तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाते हैं या टकराव और गहराता है।

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