अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक पहल, इशाक डार ने अराघची से की बातचीत; युद्धविराम पर बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य झड़पों ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। दोनों देशों के बीच हाल में हुए युद्धविराम समझौते पर नए सिरे से सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच पाकिस्तान ने कूटनीतिक सक्रियता दिखाते हुए विदेश मंत्री इशाक डार और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच अहम बातचीत कराई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और आपसी सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव से वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
इशाक डार और अराघची के बीच क्या हुई बातचीत?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री इशाक डार ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की। बातचीत के दौरान डार ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र और उसके बाहर स्थायी शांति तथा स्थिरता स्थापित करने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात पर विचार साझा किए और भविष्य में भी लगातार संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। पाकिस्तान ने संवाद और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
ईरान ने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की
बातचीत के दौरान ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने ईरानी मछुआरों की सुरक्षित और सुचारु वापसी सुनिश्चित करने में पाकिस्तान द्वारा दिए गए सहयोग के लिए इस्लामाबाद का धन्यवाद भी व्यक्त किया। दोनों पक्षों ने सीमा पार सहयोग, मानवीय मुद्दों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर समन्वय बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच पड़ोसी देशों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा सैन्य तनाव
ताजा घटनाक्रम की शुरुआत एक वाणिज्यिक तेल टैंकर पर हुए ड्रोन हमले के बाद हुई। इसके बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमले के जवाब में की गई। दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले करने का दावा किया है। इन घटनाओं ने दोनों देशों के बीच तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी सुरक्षा चिंता
तनाव बढ़ने के बाद संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी समुद्री एजेंसी ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही से जुड़े अपने संचालन को अस्थायी रूप से रोक दिया। एजेंसी का कहना है कि जब तक समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होने का भरोसा नहीं मिल जाता, तब तक सामान्य गतिविधियां बहाल नहीं की जाएंगी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
युद्धविराम समझौते के भविष्य पर उठे सवाल
हालिया सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच पिछले सप्ताह हुए अंतरिम युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने के प्रयास जारी थे। हालांकि ताजा हमलों के बाद इस प्रक्रिया पर अनिश्चितता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष जल्द ही बातचीत का रास्ता नहीं अपनाते, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति तथा क्षेत्रीय देशों की कूटनीतिक पहल पर टिकी हुई है।