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13 साल पुराने विपिन बाफना हत्याकांड में बड़ा फैसला, फांसी की सजा बदली गई

Father sentenced in case involving inappropriate act with minor daughter; major verdict by POCSO court.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनाया अहम निर्णय

नासिक के चर्चित विपिन बाफना अपहरण और हत्याकांड में बॉम्बे हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो दोषियों की मौत की सजा को कम कर दिया है। अदालत ने दोनों आरोपियों की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन फांसी की सजा को 30 वर्ष के कठोर आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया। यह फैसला विशेष अदालत के उस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर आया है, जिसमें दोनों आरोपियों को मृत्युदंड दिया गया था। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की फांसी बरकरार रखने की मांग को भी अस्वीकार कर दिया।

2022 में विशेष अदालत ने सुनाई थी फांसी

इस मामले में दिसंबर 2022 में नासिक की विशेष अदालत ने दो मुख्य आरोपियों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने मामले को गंभीर और जघन्य अपराध की श्रेणी में माना था। हालांकि बाद में दोषियों ने सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान अदालत ने अपराध की प्रकृति, आरोपियों की उम्र और अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार किया। इसके बाद हाई कोर्ट ने मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलने का फैसला सुनाया।

डांस क्लास के लिए निकला था युवक, फिर हुआ लापता

मामला जून 2013 का है, जब 22 वर्षीय विपिन बाफना अपने घर से डांस क्लास जाने के लिए निकला था। शाम तक घर नहीं लौटने पर परिवार चिंतित हो गया। उसी रात उसने परिवार से फोन पर संपर्क कर बताया कि वह एक मित्र के घर रुक रहा है। लेकिन अगले दिन परिजनों को पता चला कि वह डांस क्लास पहुंचा ही नहीं था। इसके बाद परिवार ने उसकी तलाश शुरू की और मामला धीरे-धीरे अपहरण के संदेह में बदल गया।

एक करोड़ की फिरौती मांगने के बाद हुई हत्या

जांच के दौरान सामने आया कि युवक के अपहरण के बाद उसके परिवार से एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई थी। कॉल करने वाले ने पुलिस को जानकारी न देने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद युवक का मोबाइल बंद हो गया और उससे संपर्क नहीं हो सका। पुलिस जांच में बाद में पता चला कि अपहरण के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाया गया।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया फैसला

करीब 13 वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब हाई कोर्ट ने अंतिम रूप से सजा में संशोधन किया है। अदालत ने दोषियों की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए कहा कि अपराध गंभीर था, लेकिन मामले की परिस्थितियों को देखते हुए मृत्युदंड के बजाय 30 साल का कठोर आजीवन कारावास उचित होगा। इस फैसले के साथ लंबे समय से चल रहा यह चर्चित मामला एक नए कानूनी निष्कर्ष तक पहुंच गया है।

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