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केतन अग्रवाल हत्याकांड में बड़ा खुलासा: दुकान का नौकर बना सरकारी गवाह, केस हुआ और मजबूत

ketan agarwal murder case

पुणे के लोहगढ़ किले पर हुए कारोबारी केतन अग्रवाल (26) हत्याकांड में जांच को निर्णायक मोड़ मिल गया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी चेतन चौधरी के दुकान में काम करने वाले नीरज कुमार को सरकारी गवाह बना लिया है। उसकी गवाही और डिजिटल सबूतों ने इस पूरे मामले को नई दिशा दी है। पुलिस का दावा है कि मोबाइल फोन की हेराफेरी और CCTV फुटेज से हत्या की साजिश स्पष्ट होती जा रही है। इस मामले में अब आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

सरकारी गवाह बना नौकर, जांच में बड़ा मोड़

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी चेतन चौधरी ने अपने कर्मचारी नीरज कुमार को अनजाने में इस पूरे मामले की अहम कड़ी बना दिया। नीरज कुमार ने पुलिस को बयान दिया है कि घटना वाले दिन उसका मोबाइल फोन उसके पास नहीं था, बल्कि आरोपी के पास था। पुलिस ने नीरज को सरकारी गवाह बनाकर अदालत में पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है। उसकी गवाही से यह साबित करने में मदद मिलेगी कि वारदात के समय चेतन चौधरी घटनास्थल पर मौजूद था।

मोबाइल फोन की चाल से खुला हत्या का राज

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए अपने मोबाइल की जगह अपने कर्मचारी का फोन साथ लिया था। 18 जून को हत्या वाले दिन आरोपी ने अपना मोबाइल दुकान पर छोड़ दिया और नीरज का मोबाइल लेकर लोहगढ़ किले पहुंचा। इस दौरान आरोपी ने लोकेशन छिपाने और खुद को दुकान पर मौजूद दिखाने की कोशिश की। लेकिन कॉल डिटेल्स और लोकेशन डेटा ने इस पूरी योजना की परतें खोल दीं, जिससे हत्या की साजिश उजागर हुई।

CCTV फुटेज से मिली अहम कड़ी

लोहगढ़ किले के पास लगे CCTV कैमरों में हुडी पहने एक संदिग्ध व्यक्ति को केतन अग्रवाल और सिया गोयल का पीछा करते हुए देखा गया। पुलिस के अनुसार यह व्यक्ति चेतन चौधरी ही था। फुटेज में यह भी दिखाई देता है कि आरोपी ने बेहद कम समय में वारदात को अंजाम दिया और तुरंत नीचे आ गया। सुरक्षा गार्ड के बयान से भी पुष्टि हुई है कि आरोपी ने किले में प्रवेश करते समय बहाना बनाया था। यह सभी सबूत केस को मजबूत बना रहे हैं।

सिया गोयल पर शक और बदलते बयान

जांच में सिया गोयल के बयान लगातार बदलने से पुलिस का शक और गहरा गया। पहले उसने दुर्घटना बताया, फिर बयान बदलकर अलग कारण दिए। पुलिस को उसके फोन में घटना से जुड़ी कोई तस्वीर भी नहीं मिली, जिससे संदेह और बढ़ गया। अधिकारियों का मानना है कि साजिश पहले से रची गई थी और दोनों आरोपियों ने मिलकर लोहगढ़ किले के सुनसान हिस्से को वारदात के लिए चुना था।

पुलिस जांच तेज, साजिश की परतें खुलीं

पुलिस का कहना है कि डिजिटल सबूत, मोबाइल डेटा, CCTV फुटेज और गवाह की गवाही के आधार पर पूरा मामला अब मजबूत स्थिति में है। जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात से पहले इलाके की रेकी की गई थी। पुलिस दोनों आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। अधिकारियों के अनुसार, यह केस अब साजिश और सुनियोजित हत्या की दिशा में आगे बढ़ चुका है।

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