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होर्मुज से फिर दौड़े तेल टैंकर, 20 लाख बैरल क्रूड लेकर भारत के लिए रवाना हुआ IOC का जहाज

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेतों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिली है। होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे तेल टैंकरों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है, जिससे कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। इसी क्रम में इंडियन ऑयल का एक चार्टर्ड सुपरटैंकर 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हो चुका है। इस घटनाक्रम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर भी दबाव कम होता दिख रहा है।

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद खुला अहम समुद्री मार्ग

मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के बीच वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में अब सामान्य स्थिति लौटती दिखाई दे रही है। अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम सहमति बनने के बाद कई दिनों से रुकी तेल आपूर्ति फिर शुरू हो गई है। शिपिंग डेटा के अनुसार, बुधवार को लगभग 50 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर तीन बड़े टैंकर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से बाहर निकले। इससे वैश्विक बाजार को यह संकेत मिला है कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में आया व्यवधान धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है और तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है।

भारत के लिए रवाना हुआ इंडियन ऑयल का सुपरटैंकर

होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले प्रमुख जहाजों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) का चार्टर्ड सुपरटैंकर ‘प्लाटा कैरियर’ भी शामिल है। यह जहाज सऊदी अरब से करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ चुका है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि हालिया तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस खेप के सुरक्षित पहुंचने से भारतीय रिफाइनरियों को राहत मिलेगी और घरेलू ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

एशियाई देशों को भी मिलेगी राहत

भारत के अलावा दक्षिण कोरिया को भी तेल आपूर्ति में राहत मिलने वाली है। दक्षिण कोरियाई कंपनी द्वारा चार्टर्ड किया गया एक बड़ा टैंकर कतर और अबू धाबी से करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल और कंडेनसेट लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो चुका है। वहीं, एक अन्य जहाज इराकी बसरा क्रूड ऑयल लेकर ओमान पहुंच रहा है। इन जहाजों की आवाजाही से यह संकेत मिल रहा है कि खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा निर्यात धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। इससे एशियाई देशों की रिफाइनिंग और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

अब भी कई जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे

हालांकि स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी समय लग सकता है। शिपिंग डेटा एजेंसियों के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव के दौरान करोड़ों बैरल कच्चा तेल विभिन्न जहाजों में फंसा हुआ था। युद्ध शुरू होने के बाद खाड़ी क्षेत्र में अटके 26 जहाजों में से कई अब सुरक्षित मार्ग से निकल चुके हैं, लेकिन बड़ी संख्या में पोत अब भी प्रतीक्षा कर रहे हैं। संबंधित एजेंसियां और समुद्री प्राधिकरण चरणबद्ध तरीके से इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास में जुटे हुए हैं।

ओमान ने बनाया विशेष समुद्री कॉरिडोर

जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ओमान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने अस्थायी समुद्री कॉरिडोर तैयार किया है। इस व्यवस्था के तहत मौजूदा शिपिंग मार्गों के समानांतर अतिरिक्त रास्ते बनाए गए हैं ताकि व्यापारिक जहाज बिना किसी बाधा के गुजर सकें। ओमान सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त कर या नेविगेशन शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इस फैसले को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

एलएनजी बाजार में भी लौट सकती है स्थिरता

कच्चे तेल के साथ-साथ तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति को लेकर भी सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। कतर के गैस निर्यात टर्मिनलों की ओर कई खाली एलएनजी टैंकर बढ़ रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि गैस निर्यात गतिविधियां जल्द सामान्य हो सकती हैं। कतर के नेतृत्व ने भी आने वाले हफ्तों में एलएनजी उत्पादन और निर्यात को सामान्य स्तर पर लाने का भरोसा जताया है। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक गैस बाजार को राहत मिलेगी और ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आने की संभावना बढ़ेगी।

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