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दिल्ली में सर्दियों में पार्किंग होगी महंगी, NDMC क्षेत्रों में 1 नवंबर से दोगुनी फीस लागू

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के ऐलान के बाद NDMC क्षेत्रों में 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक अधिकृत पार्किंग स्थलों की फीस दोगुनी कर दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे निजी वाहनों का उपयोग कम होगा और लोग सार्वजनिक परिवहन की ओर रुख करेंगे, जिससे प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।

सर्दियों में लागू होगी नई पार्किंग दरें

नई व्यवस्था के तहत लुटियंस दिल्ली सहित NDMC क्षेत्र में सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर 1 नवंबर से 28 फरवरी तक बढ़ी हुई दरें लागू रहेंगी। इस अवधि को खासतौर पर इसलिए चुना गया है क्योंकि सर्दियों में राजधानी में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक रहता है। प्रशासन का लक्ष्य है कि महंगी पार्किंग के जरिए निजी वाहनों की आवाजाही को सीमित किया जा सके।

चार पहिया और दोपहिया दोनों पर असर

नई दरों के अनुसार कार पार्किंग शुल्क 20 रुपये प्रति घंटा से बढ़ाकर 40 रुपये कर दिया गया है। वहीं बाइक और स्कूटर के लिए 10 रुपये की जगह 20 रुपये प्रति घंटा देना होगा। बसों की पार्किंग फीस भी बढ़ाकर 300 रुपये प्रति घंटा कर दी गई है। NDMC का कहना है कि यह कदम ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के तहत लिया गया है।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार की रणनीति

अधिकारियों का कहना है कि सर्दियों में दिल्ली की हवा बेहद खराब हो जाती है, ऐसे में निजी वाहनों की संख्या कम करना जरूरी है। महंगी पार्किंग लोगों को मेट्रो, बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। सरकार का उद्देश्य ट्रैफिक दबाव कम करना और प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करना है।

पहले भी लागू हो चुका है ऐसा फैसला

यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली में सर्दियों के दौरान पार्किंग फीस बढ़ाई गई है। इससे पहले 2023 और 2024 में भी इसी तरह के आदेश लागू किए जा चुके हैं। हालांकि पिछले अनुभव बताते हैं कि महंगी पार्किंग के बावजूद कई लोग निजी वाहनों का उपयोग जारी रखते हैं।

लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

पृथ्वीराज मार्केट जैसे इलाकों में पार्किंग स्टाफ के अनुसार रोजाना 60 से 80 वाहन आते हैं। कुछ लोग बढ़ी हुई दर देखकर वापस लौट गए, जबकि अधिकांश ने शुल्क चुका दिया। आम जनता की राय बंटी हुई है—कुछ इसे जरूरी कदम बता रहे हैं तो कुछ इसे अतिरिक्त आर्थिक बोझ मान रहे हैं।

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