दिल्ली डॉक्टर मेड मर्डर केस में नया मोड़, वारदात से पहले डॉ. गुप्ता के व्यवहार में दिखे बड़े बदलाव
दिल्ली के माउंट कैलाश इलाके में घरेलू सहायिका की हत्या के मामले में नया खुलासा सामने आया है। आरोपी डॉक्टर मनीष गुप्ता को लेकर पड़ोसियों, मरीजों और परिचितों ने बताया कि घटना से कुछ दिन पहले उनके व्यवहार में अचानक बदलाव देखने को मिला था। वह अधिक शांत, अलग-थलग और कम बातचीत करने लगे थे। पुलिस अब इन मानसिक और व्यवहारिक बदलावों को जांच की अहम कड़ी मानकर आगे की पड़ताल कर रही है।
वारदात से पहले दिखा व्यवहार में बदलाव
पड़ोसियों के अनुसार, घटना से लगभग 3-4 दिन पहले डॉ. मनीष गुप्ता का व्यवहार पूरी तरह बदल गया था। वे पहले की तुलना में काफी शांत और चुप रहने लगे थे। न तो पहले की तरह पड़ोसियों से बातचीत करते थे और न ही सामान्य सामाजिक व्यवहार दिखा रहे थे। कुछ मरीजों ने भी उनके व्यवहार में असामान्य बदलाव महसूस किए थे, हालांकि उस समय किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
अवसाद की दवाओं का भी सामने आया जिक्र
कुछ जानकारों ने बताया कि डॉक्टर के अवसाद (डिप्रेशन) से जुड़ी दवाएं लेने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा गोपनीय रखा और किसी से इस बारे में खुलकर बात नहीं की। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या मानसिक स्थिति इस पूरे मामले में कोई भूमिका निभा सकती है।
मददगार और समाजसेवी की छवि भी चर्चा में
आरोपी डॉक्टर की छवि समाज में काफी सकारात्मक रही है। पड़ोसियों और घरेलू सहायिका से जुड़े लोगों ने बताया कि वे मददगार स्वभाव के व्यक्ति थे और कई बार जरूरतमंदों की मदद कर चुके थे। उन्होंने कई लोगों का मुफ्त या रियायती इलाज भी किया था। इस वजह से हत्या जैसे गंभीर आरोप ने सभी को चौंका दिया है।
पशु कल्याण और कोरोना काल में भी सक्रिय रहे
स्थानीय लोगों के अनुसार डॉ. गुप्ता पशु कल्याण और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते थे। कोरोना काल के दौरान उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर और जरूरतमंदों की मदद के लिए अभियान में योगदान दिया था। पिछले 15 वर्षों से वे माउंट कैलाश में रह रहे थे और एक शांत, विनम्र डॉक्टर के रूप में जाने जाते थे।
पुलिस जांच में मानसिक स्थिति पर फोकस
पुलिस अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में एक सम्मानित डॉक्टर पर इतना गंभीर आरोप लगा। जांच में उनके व्यवहार में आए बदलाव, मानसिक स्थिति और घरेलू सहायिका के साथ संबंधों को प्रमुख एंगल के रूप में देखा जा रहा है। पड़ोसियों और परिचितों द्वारा बताए गए बदलाव अब जांच की अहम कड़ी बन चुके हैं।