55 चौके-8 छक्के, बिहार की बेटी अक्षरा गुप्ता ने ठोके नाबाद 306 रन, महिला क्रिकेट में रचा इतिहास
बिहार की 15 वर्षीय बल्लेबाज अक्षरा गुप्ता ने महिला घरेलू क्रिकेट में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से नया इतिहास रच दिया है। BCA महिला अंडर-19 वनडे ट्रॉफी में उन्होंने महज 126 गेंदों में नाबाद 306 रन बनाकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी इस यादगार पारी के बाद क्रिकेट जगत में उनकी खूब चर्चा हो रही है।
126 गेंदों में खेली रिकॉर्डतोड़ पारी
भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड मैदान में आयोजित BCA महिला अंडर-19 वनडे ट्रॉफी के मुकाबले में अक्षरा गुप्ता ने तूफानी बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने सिर्फ 126 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 306 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 55 चौके और 8 छक्के निकले। 242.86 के स्ट्राइक रेट से खेली गई इस पारी ने उन्हें महिला घरेलू क्रिकेट की सबसे यादगार पारियों में शामिल कर दिया है।
महिला घरेलू क्रिकेट के बड़े रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम
अक्षरा गुप्ता अब महिला घरेलू क्रिकेट में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाली दूसरी खिलाड़ी बन गई हैं। इस सूची में शीर्ष स्थान मुंबई की इरा गुप्ता के नाम है, जिन्होंने एक घरेलू मुकाबले में नाबाद 346 रन बनाए थे। अक्षरा की 306 रन की पारी ने उन्हें देश की उभरती हुई प्रतिभाओं में शामिल कर दिया है और क्रिकेट विशेषज्ञ भी उनके प्रदर्शन की सराहना कर रहे हैं।
16 गेंदों में अर्धशतक, 34 गेंदों में पूरा किया शतक
अक्षरा ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने केवल 16 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया, जबकि शतक तक पहुंचने में उन्हें सिर्फ 34 गेंदें लगीं। उनकी शानदार टाइमिंग और बेहतरीन शॉट चयन ने विरोधी गेंदबाजों को पूरी तरह बेबस कर दिया। पूरे मैच के दौरान उन्होंने लगातार रनगति बनाए रखी और विरोधी टीम को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।
संघर्षों के बीच तैयार हुई बिहार की नई स्टार
बिहार के रक्सौल की रहने वाली अक्षरा गुप्ता साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता राज किशोर शाह चिकन की दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार ने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटी के सपनों को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। घर के पास बनाए गए नेट में अभ्यास और परिवार के सहयोग ने अक्षरा को इस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
8 साल की उम्र में शुरू हुआ क्रिकेट का सफर
अक्षरा ने महज आठ वर्ष की उम्र में पहली बार बल्ला पकड़ा था। शुरुआत में उन्होंने गांव के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलते हुए अपने खेल को निखारा। नियमित अभ्यास और जुनून के दम पर उन्होंने कम उम्र में ही अपनी पहचान बना ली। उनके चाचा ने भी उनकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और लगातार उन्हें प्रोत्साहित करते रहे।
2024 में मिली बड़ी पहचान, अब भविष्य पर सबकी नजर
साल 2024 अक्षरा के करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ, जब उन्हें बिहार अंडर-19 महिला टीम में जगह मिली। इसके बाद कम उम्र में ही उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। वह बीसीसीआई के आयु वर्ग के चारों प्रमुख टूर्नामेंट एक ही सीजन में खेलने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी भी बन चुकी हैं। अब उनकी नजर बड़े मंच पर खुद को साबित करने पर है।
बिहार क्रिकेट संघ ने दी बधाई
अक्षरा की ऐतिहासिक पारी के बाद बिहार क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। संघ का कहना है कि इस तरह के प्रदर्शन से राज्य की युवा महिला खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और बिहार में महिला क्रिकेट का भविष्य और मजबूत होगा।