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होर्मुज हमले में भारतीय नाविक की मौत, पत्नी बोलीं- अब मेरे बच्चों को कौन कहेगा बेटा?

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ऑयल टैंकर पर हुए हमले में उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी भारतीय नाविक शिवानंद चौरसिया की मौत की पुष्टि के बाद उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पति की मौत की खबर सुनकर पत्नी सुशीला देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने सरकार से पति का पार्थिव शरीर भारत लाने और परिवार को सहायता देने की मांग की है। इस घटना ने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है।

हमले के बाद लापता हुए, फिर आई मौत की खबर

देवरिया जिले के सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया ऑयल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर इंजन फिटर के रूप में कार्यरत थे। 10 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जहाज पर हुए हमले के बाद वे लापता हो गए थे। लगातार खोजबीन और जांच के बाद 11 जून को उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी गई। इस खबर के सामने आते ही परिवार में मातम छा गया। गांव के लोगों को भी इस घटना पर विश्वास नहीं हो रहा है। शिवानंद लंबे समय से समुद्री सेवा में कार्यरत थे और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

पत्नी का दर्द: “मेरे बच्चों को अब कौन पापा कहेगा”

पति की मौत की खबर सुनकर पत्नी सुशीला देवी पूरी तरह टूट गई हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनकी शादी को अभी केवल आठ साल हुए थे और अब उनकी पूरी दुनिया उजड़ गई। सुशीला ने कहा कि उनके दो छोटे बच्चे हैं, जिनका भविष्य अब अनिश्चित हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब उनके बच्चों को कौन सहारा देगा और कौन उन्हें पिता का प्यार देगा। सुशीला ने सरकार से अपील की है कि उनके पति का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाया जाए और परिवार की मदद की जाए।

आखिरी बार पिता से हुई थी बातचीत

शिवानंद की बहन सोनी चौरसिया ने बताया कि हादसे से ठीक एक दिन पहले शिवानंद ने अपने पिता को फोन किया था। यह बातचीत केवल एक मिनट की थी, लेकिन उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया था कि सब कुछ ठीक है। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द घर लौटेंगे, लेकिन अगले ही दिन जहाज पर हमले की खबर आ गई। बहन ने कहा कि यह उनकी आखिरी बातचीत थी और अब वही यादें परिवार के पास बची हैं। परिवार को आज भी यकीन नहीं हो रहा कि शिवानंद अब इस दुनिया में नहीं हैं।

पूरे गांव में पसरा मातम

शिवानंद चौरसिया की मौत की खबर से सुरौली गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि शिवानंद मेहनती और जिम्मेदार व्यक्ति थे, जो अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए विदेश में काम कर रहे थे। उनके निधन से न केवल परिवार बल्कि पूरा गांव स्तब्ध है। लोग लगातार परिवार के घर पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं। गांव के लोगों ने भी सरकार से परिवार को आर्थिक सहायता और सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।

परिवार ने सरकार से लगाई मदद की गुहार

परिजनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि शिवानंद का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाया जाए ताकि अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक किया जा सके। परिवार ने आर्थिक सहायता और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए विशेष मदद की भी मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को और प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

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