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राज्यसभा टिकट पर कांग्रेस में हलचल: राजस्थान के 5 जिलाध्यक्षों ने राहुल गांधी को लिखा पत्र, दक्षिण राजस्थान की अनदेखी का उठाया मुद्दा

राजस्थान से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार के चयन से पहले पार्टी के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। उदयपुर संभाग के पांच जिलाध्यक्षों और कई वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष दक्षिण राजस्थान को प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई। नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र भेजकर कहा कि पिछले कई दशकों से उदयपुर संभाग की उपेक्षा की जा रही है। हालांकि अंततः कांग्रेस ने नीरज डांगी को दोबारा उम्मीदवार बनाने का फैसला किया, जिससे क्षेत्रीय नेताओं में निराशा देखने को मिली।

दिल्ली में डेरा डालकर नेतृत्व तक पहुंचाई मांग

राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम तय होने से पहले उदयपुर संभाग के कई कांग्रेस नेता दिल्ली पहुंचे और पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की कोशिश की। नेताओं का कहना था कि दक्षिण राजस्थान लंबे समय से कांग्रेस का मजबूत आधार क्षेत्र रहा है, इसलिए इस बार राज्यसभा में इसी क्षेत्र से किसी नेता को भेजा जाना चाहिए। प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखने के लिए नेताओं ने सामूहिक रूप से पत्र भी लिखा और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की मांग को प्रमुखता से उठाया।

46 वर्षों से प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का दावा

पत्र में नेताओं ने दावा किया कि वर्ष 1980 के बाद से उदयपुर संभाग के किसी कांग्रेस कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजने का अवसर नहीं मिला। उनका कहना है कि पूर्व राज्यसभा सांसद धूलेश्वर मीणा के बाद इस क्षेत्र को उच्च सदन में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। कांग्रेस नेताओं ने तर्क दिया कि राजस्थान से कई बार बड़ी संख्या में कांग्रेस सांसद राज्यसभा पहुंचे, लेकिन उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूम्बर जैसे क्षेत्रों को लगातार नजरअंदाज किया गया।

जिलाध्यक्षों और नेताओं ने उठाई क्षेत्रीय संतुलन की मांग

चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, उदयपुर शहर, बांसवाड़ा और सलूम्बर के जिलाध्यक्षों ने संयुक्त रूप से कांग्रेस नेतृत्व को भेजे पत्र में कहा कि पार्टी को क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर ध्यान देना चाहिए। पत्र पर एआईसीसी सदस्य दिनेश खोड़निया के हस्ताक्षर भी थे। नेताओं का मानना है कि दक्षिण राजस्थान में कांग्रेस का मजबूत संगठनात्मक आधार होने के बावजूद वहां के कार्यकर्ताओं को राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण मंचों पर अवसर नहीं मिल रहा है।

बीएपी के उभार और वोट बैंक की चिंता

कांग्रेस नेताओं ने अपने पत्र में क्षेत्र में उभरती राजनीतिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि आदिवासी इलाकों में नई राजनीतिक ताकतों के उभार से कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक प्रभावित हुआ है। नेताओं ने संकेत दिया कि यदि स्थानीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसले नहीं लिए गए तो भविष्य में पार्टी को और नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने भाजपा द्वारा विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति का भी उल्लेख किया।

कई नेताओं के नाम थे चर्चा में

राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में कई नामों पर चर्चा चल रही थी। नीरज डांगी के अलावा पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी और एआईसीसी सदस्य दिनेश खोड़निया के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल थे। हालांकि अंततः पार्टी नेतृत्व ने नीरज डांगी पर भरोसा जताया। इसके बाद भी दक्षिण राजस्थान के नेताओं ने भविष्य में क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग दोहराई है।

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