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Mukesh Ambani Net Worth: 5 महीने में 2 लाख करोड़ से ज्यादा घटी दौलत, अरबपतियों की लिस्ट में फिसले मुकेश अंबानी

मुंबई। देश के सबसे धनी उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को वर्ष 2026 की शुरुआत में बड़ा वित्तीय झटका लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल के पहले पांच महीनों (जनवरी से मई) में उनकी नेटवर्थ में करीब 2.09 लाख करोड़ रुपये (लगभग 24 अरब डॉलर) की भारी गिरावट दर्ज की गई है। संपत्ति में आई इस कमी के कारण वैश्विक और एशियाई अरबपतियों की सूची में उनकी रैंकिंग भी नीचे खिसक गई है। हालांकि, इस गिरावट के बावजूद वे भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं।

जनवरी से मई तक 24 अरब डॉलर का नुकसान

वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जनवरी 2026 से मई 2026 के बीच मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति में करीब 24 अरब डॉलर की कमी आई है। भारतीय मुद्रा के हिसाब से यह राशि लगभग 2.09 लाख करोड़ रुपये बनती है। यह गिरावट शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का सीधा परिणाम मानी जा रही है। इसके बावजूद, मुकेश अंबानी की कुल नेटवर्थ अभी भी अरबों डॉलर में है, जो उनके व्यापार साम्राज्य की विशालता को दर्शाती है।

क्यों घटी मुकेश अंबानी की दौलत?

मुकेश अंबानी की संपत्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयरों से जुड़ा हुआ है। पिछले कुछ महीनों में कंपनी के शेयरों में तेजी के बजाय दबाव देखने को मिला, जिसका सीधा असर उनकी व्यक्तिगत नेटवर्थ पर पड़ा। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में हो रहा उतार-चढ़ाव और समग्र शेयर बाजार की कमजोरी इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं। जब स्टॉक मार्केट में गिरावट आती है, तो कंपनियों का बाजार पूंजीकरण कम हो जाता है, जिससे प्रमोटरों की संपत्ति भी प्रभावित होती है।

अमीरों की लिस्ट में फिसली रैंकिंग

संपत्ति में आई इस भारी गिरावट का असर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने प्रतिष्ठित अरबपतियों की सूची में भी बदलाव किया है। वैश्विक स्तर पर सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में मुकेश अंबानी की रैंकिंग नीचे चली गई है। इसी तरह, एशिया के अमीरों की सूची में भी उन्हें एक स्थान का नुकसान उठाना पड़ा है। गौतम अदानी और अन्य उद्योगपतियों के साथ उनकी प्रतिस्पर्धा में यह गिरावट एक महत्वपूर्ण कारक साबित हो सकती है, हालांकि वे अभी भी शीर्ष पायदान पर काबिज हैं।

क्या यह चिंता का विषय है? विशेषज्ञों की राय

बाजार जानकारों और वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद मुकेश अंबानी की वित्तीय स्थिति बेहद मजबूत बनी हुई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का कारोबार अब केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टेलीकॉम (जियो), रिटेल, डिजिटल सेवाओं और हरित ऊर्जा जैसे विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले महीनों में शेयर बाजार में तेजी लौटती है और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तो मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में फिर से तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

रिलायंस का दबदबा बना हुआ है

भले ही इस साल उनकी व्यक्तिगत संपत्ति में बड़ी गिरावट आई हो, लेकिन मुकेश अंबानी अब भी भारत के सबसे बड़े और प्रभावशाली उद्योगपतियों में गिने जाते हैं। कारोबार की दुनिया में उनका प्रभाव और रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार मूल्य अब भी काफी मजबूत माना जाता है। कंपनी द्वारा की जा रही नई निवेश योजनाएं और विस्तार के कार्य भविष्य में शेयर कीमतों को स्थिर करने और बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं। इसलिए, इस अस्थायी गिरावट को दीर्घकालिक नुकसान के रूप में नहीं देखा जा रहा है।

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