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जैसलमेर डंपिंग यार्ड में सैकड़ों गौवंश के शव मिलने से हड़कंप, ठेकेदार ब्लैकलिस्ट

जैसलमेर में नगर परिषद के डंपिंग यार्ड से सामने आई सैकड़ों मृत गौवंशों की तस्वीरों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और लापरवाही के आरोप में ठेकेदार का अनुबंध रद्द कर उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। तेज गर्मी में खुले में पड़े शवों से फैल रही दुर्गंध और संक्रमण के खतरे ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है, जहां विपक्ष ने सरकार को घेरा तो प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई का दावा किया।

एक महीने से खुले में पड़े थे मृत पशुओं के शव

जानकारी के अनुसार जैसलमेर नगर परिषद के डंपिंग यार्ड में पिछले करीब एक महीने से मृत गौवंश और अन्य पशुओं के शव खुले में पड़े हुए थे। भीषण गर्मी के कारण शव तेजी से सड़ने लगे, जिससे आसपास के क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल गई। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन को शिकायत दी, लेकिन समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई। रविवार को जब सैकड़ों शवों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, तब पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे।

वीडियो वायरल होते ही प्रशासन ने की कार्रवाई

मामले के सार्वजनिक होने के बाद नगर परिषद प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ। नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह सोढ़ा ने ठेकेदार गोपाराम को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अधिकारियों के मुताबिक ठेकेदार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वर्ष 2025-26 का ठेका निरस्त कर दिया गया। साथ ही उसकी जमा धरोहर राशि जब्त करते हुए उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इसके बाद नगर परिषद और प्रशासन की संयुक्त टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से गहरे गड्ढे खुदवाकर मृत पशुओं का निस्तारण कराया।

संक्रमण फैलने का बढ़ा खतरा

पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने माना कि खुले में पड़े शवों से संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया था। संयुक्त निदेशक डॉ. उमेश वारगंटीवार ने बताया कि मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की थी, लेकिन गंभीर लापरवाही के कारण शव लंबे समय तक खुले में पड़े रहे। प्रशासनिक टीम ने सभी शवों को मिट्टी में दबाकर सुरक्षित तरीके से निस्तारित किया। अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति एक-दो दिन की नहीं बल्कि कई सप्ताह से जारी लापरवाही का परिणाम थी।

राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज

घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए गौसंरक्षण के मुद्दे पर सवाल उठाए। कांग्रेस प्रवक्ता विकास व्यास ने कहा कि गौमाता के नाम पर राजनीति करने वाले अब इस मामले पर चुप क्यों हैं। वहीं भाजपा नेताओं ने इसे ठेकेदार की व्यक्तिगत लापरवाही बताते हुए कहा कि प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की है। भाजपा सोशल मीडिया संयोजक आकाश ओझा ने कहा कि पार्टी गौमाता को पूजनीय मानती है और मामले को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।

प्रशासन ने अफवाहों का किया खंडन

नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन अफवाहों का भी खंडन किया, जिनमें कहा जा रहा था कि कचरा खाने से पशुओं की मौत हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डंपिंग यार्ड केवल मृत पशुओं के निस्तारण के लिए निर्धारित स्थान था। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार शवों को कुछ समय बाद गड्ढों में दबाया जाता है, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के कारण यह प्रक्रिया समय पर नहीं हो सकी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी रखी जाएगी।

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