ADR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: केरल कैबिनेट के 15 मंत्री करोड़पति, 18 पर आपराधिक केस दर्ज
15 मंत्री करोड़पति, 18 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज
Association for Democratic Reforms और Kerala Election Watch की रिपोर्ट में केरल की नई सरकार को लेकर कई बड़े खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री V. D. Satheesan की कैबिनेट में शामिल 20 मंत्रियों में से 15 करोड़पति हैं, जबकि 18 मंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इनमें से कई मामलों को गंभीर श्रेणी में रखा गया है। यह रिपोर्ट मंत्रियों के चुनावी हलफनामों के विश्लेषण पर आधारित है।
90 प्रतिशत मंत्रियों पर दर्ज हैं आपराधिक मामले
ADR की रिपोर्ट के मुताबिक विश्लेषण किए गए 20 मंत्रियों में से 18 यानी करीब 90 प्रतिशत मंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें से 14 मंत्रियों पर गंभीर आपराधिक आरोप भी दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा राज्य की राजनीति में आपराधिक मामलों की बढ़ती मौजूदगी को दर्शाता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी मामले का दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जाता। फिर भी यह आंकड़े राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गए हैं।
15 मंत्री करोड़पति, औसत संपत्ति 6.32 करोड़
रिपोर्ट में बताया गया है कि कैबिनेट के 15 मंत्री करोड़पति हैं। 20 मंत्रियों की औसत संपत्ति लगभग 6.32 करोड़ रुपए बताई गई है। Shibu Baby John ने सबसे ज्यादा 24.63 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की है। वहीं O. J. Janesh ने सबसे कम 57.08 लाख रुपए की संपत्ति बताई है। ADR का कहना है कि यह आंकड़े चुनाव आयोग में जमा कराए गए शपथपत्रों के आधार पर तैयार किए गए हैं।
शिक्षा के मामले में अधिकांश मंत्री ग्रेजुएट
रिपोर्ट में मंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता का भी विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार तीन मंत्रियों की शिक्षा 10वीं से 12वीं तक है, जबकि 17 मंत्रियों के पास स्नातक या उससे उच्च डिग्री मौजूद है। यानी करीब 85 प्रतिशत मंत्री उच्च शिक्षित हैं। इसके अलावा उम्र के आंकड़ों में बताया गया कि छह मंत्री 31 से 50 वर्ष की आयु वर्ग में आते हैं, जबकि 14 मंत्रियों की उम्र 51 से 80 वर्ष के बीच है।
कैबिनेट में सिर्फ दो महिलाएं
ADR रिपोर्ट के अनुसार केरल मंत्रिमंडल में कुल 21 सदस्यों में से केवल दो महिलाएं शामिल हैं। यानी महिला प्रतिनिधित्व करीब 10 प्रतिशत के आसपास है। रिपोर्ट में मंत्री C. P. John के हलफनामे का विश्लेषण शामिल नहीं किया गया, क्योंकि चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेज स्पष्ट नहीं था। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।