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पीएम मोदी के वीडियो पर राहुल गांधी का हमला, प्रेस की आजादी पर छिड़ी बहस

प्रधानमंत्री Narendra Modi के नॉर्वे दौरे का एक वीडियो सामने आने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में एक नॉर्वेजियन पत्रकार प्रधानमंत्री से प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर सवाल पूछती नजर आ रही हैं, जबकि पीएम मोदी आगे बढ़ जाते हैं। इस वीडियो को लेकर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने सरकार पर निशाना साधा है। वहीं भारतीय दूतावास ने भी इस मामले पर सफाई देते हुए पत्रकार को प्रेस ब्रीफिंग में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा करते हुए प्रधानमंत्री पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि जब किसी के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं होता, तो डरने की भी जरूरत नहीं होती। राहुल गांधी ने कहा कि जब दुनिया यह देखती है कि भारत के प्रधानमंत्री सवालों से बचते नजर आते हैं, तो इसका असर देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर पड़ता है। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को प्रेस की स्वतंत्रता और जवाबदेही से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश की है।

पत्रकार ने पूछा था प्रेस की आजादी पर सवाल

वीडियो में नॉर्वे की पत्रकार Hege Løken प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछती दिखाई देती हैं। उन्होंने पूछा कि “आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों का जवाब क्यों नहीं देते?” बाद में पत्रकार ने भी यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि प्रधानमंत्री उनके सवाल का जवाब देंगे। पत्रकार ने प्रेस फ्रीडम इंडेक्स का हवाला देते हुए कहा कि नॉर्वे प्रेस की स्वतंत्रता में दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि भारत की रैंकिंग काफी नीचे है।

भारतीय दूतावास ने दी सफाई

इस पूरे विवाद पर Embassy of India in Norway की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। दूतावास ने पत्रकार के पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की यात्रा को लेकर रात 9:30 बजे होटल रैडिसन ब्लू प्लाजा में प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की गई थी। दूतावास ने पत्रकार को वहां आकर अपने सवाल पूछने के लिए आमंत्रित किया। सरकार समर्थकों का कहना है कि किसी एक वीडियो क्लिप के आधार पर पूरे घटनाक्रम को नहीं देखा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। एक तरफ विपक्ष इसे प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़ रहा है, वहीं भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक प्रचार बता रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि विदेशी दौरों के दौरान सुरक्षा और तय कार्यक्रमों के कारण हर सवाल का जवाब देना संभव नहीं होता। हालांकि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है।

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