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20 साल की सजा: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को पोक्सो कोर्ट का कड़ा फैसला

अलवर में नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में पोक्सो कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर आर्थिक दंड भी लगाया है। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में ऐसे अपराधों के खिलाफ एक कड़ा संदेश भी देता है।

कोर्ट का सख्त फैसला, दोषी को 20 साल की सजा

अलवर की पोक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में आरोपी राम मुरारी उर्फ लाला मीणा को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने 30 हजार रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया है। विशिष्ट लोक अभियोजक विनोद शर्मा के अनुसार, अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी माना। यह फैसला ऐसे अपराधों के प्रति न्यायपालिका की सख्त नीति को दर्शाता है और समाज में कानून का भय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

नशीला पदार्थ पिलाकर वारदात को दिया अंजाम

मामले के अनुसार, पीड़िता की मां ने 27 जून 2024 को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी और उसका साथी दुकान पर सामान लेने के बहाने आते-जाते थे और धीरे-धीरे नाबालिग से संपर्क बढ़ाने लगे। 24 जून को आरोपियों ने बालिका को कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उसे बेसुध कर दिया। होश आने पर पीड़िता ने खुद को असहाय स्थिति में पाया। यह घटना सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई, जिससे आरोपी की आपराधिक मानसिकता साफ झलकती है।

अश्लील वीडियो बनाकर दी धमकी, की लूटपाट

घटना के बाद आरोपियों ने पीड़िता के अश्लील फोटो और वीडियो बना लिए और उन्हें वायरल करने की धमकी दी। डर के माहौल में उन्होंने पीड़िता से 20 से 30 हजार रुपए नकद और घर में रखे सोने-चांदी के आभूषण भी ले लिए। इस प्रकार, यह मामला केवल दुष्कर्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ब्लैकमेलिंग और लूटपाट जैसे गंभीर अपराध भी इसमें शामिल रहे। आरोपियों ने पीड़िता की मजबूरी का फायदा उठाकर उसे लगातार मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया।

पुलिस जांच और कोर्ट में मजबूत पैरवी बनी आधार

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्परता से जांच शुरू की और पर्याप्त साक्ष्य जुटाए। जांच के बाद आरोपी राम मुरारी के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया गया। अदालत में अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों के बयान और 24 महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर आरोपी को दोषी सिद्ध किया गया। मजबूत साक्ष्य और प्रभावी पैरवी के चलते अदालत ने सख्त सजा सुनाई, जो पीड़िता को न्याय दिलाने में निर्णायक साबित हुई।

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