अक्षय तृतीया पर सामाजिक समरसता का उत्सव: अलवर में 9 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में, सामूहिक विवाह समारोह बना मिसाल
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर अलवर में आयोजित सर्वजातीय सामूहिक विवाह समारोह ने एक बार फिर समाज में एकता, सहयोग और संस्कारों की अनूठी मिसाल पेश की। श्री राम जानकी विवाह समिति और सेवा भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य आयोजन में 9 जोड़े पूरे रीति-रिवाज के साथ विवाह बंधन में बंधे। संतों के आशीर्वाद, जनसहयोग और सामाजिक सहभागिता से यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि मानवीय मूल्यों का भी जीवंत प्रतीक बन गया।
सामाजिक समरसता का प्रतीक बना आयोजन
अलवर के मालवीय नगर स्थित आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित इस दसवें सर्वजातीय विवाह समारोह में विभिन्न समुदायों के 9 जोड़ों ने एक साथ सात फेरे लेकर जीवन की नई शुरुआत की। कार्यक्रम में वन मंत्री संजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि संत गंगा दास वेदांती और विजय मुनि महाराज जैसे संतों ने अपने आशीर्वचनों से वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। यह आयोजन समाज में जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर एकता और भाईचारे का संदेश देता नजर आया, जिसमें हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली।
वर्षों की परंपरा, बढ़ता विश्वास
सेवा भारती के जिला अध्यक्ष अतुल सिंह और सचिव राजन मल्होत्रा ने बताया कि यह आयोजन संस्था की वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। अब तक 27 विभिन्न जातियों के 119 जोड़े इस मंच के माध्यम से विवाह बंधन में बंध चुके हैं। इस वर्ष आयोजन समिति की कमान हरमीत सिंह मेंहदीरत्ता को सौंपी गई, जिन्होंने सफलतापूर्वक पूरे कार्यक्रम का संचालन किया। संस्था द्वारा बाल संस्कार, कौशल विकास, चिकित्सा शिविर और प्रतिभा सम्मान जैसे सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास भी लगातार जारी है।
भक्ति और परंपरा का संगम
कार्यक्रम की शुरुआत दूल्हों की पारंपरिक बारात से हुई, जहां सभी वर घोड़ी पर सवार होकर बैंड-बाजों के साथ समारोह स्थल पहुंचे। स्वागत के बाद मंच पर भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें भजन मंडली ने “हरे कृष्णा, हरे राम” के भजनों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम आश्रम से आए संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजन और वरमाला की रस्में संपन्न कराईं। हर जोड़े के लिए अलग-अलग वेदियां सजाई गईं, जहां परंपरागत विधि से सात फेरे कराए गए।
जनसहयोग और सम्मान की परंपरा
इस आयोजन में समाज के भामाशाहों का विशेष योगदान रहा, जिनके सहयोग से नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी का आवश्यक सामान भेंट किया गया। इसे दहेज नहीं, बल्कि ‘कन्यादान सहयोग’ के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश गया। कार्यक्रम में अग्रवाल महासभा और अन्य सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। आयोजन की सफलता में अनेक कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिन्होंने इसे एक जन-आंदोलन का रूप देने में अहम भूमिका निभाई।
जनप्रतिनिधियों का आशीर्वाद
कार्यक्रम में अलवर सांसद और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव स्वयं उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने अपने प्रतिनिधि के माध्यम से नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद और शुभकामनाएं भेजीं। उनका संदेश कार्यक्रम में पढ़कर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। इसके अलावा कई गणमान्य अतिथियों और सामाजिक नेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस आयोजन को गरिमा प्रदान की।
यह सामूहिक विवाह समारोह सिर्फ सात फेरों का आयोजन नहीं, बल्कि समाज में सहयोग, समानता और संस्कारों की मजबूत नींव का उत्सव है। जहां एक ओर जरूरतमंद परिवारों को सहारा मिला, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी गया कि जब समाज साथ खड़ा होता है, तो हर बेटी का सपना साकार हो सकता है। अक्षय तृतीया के इस शुभ दिन पर बंधे ये रिश्ते न केवल दो दिलों को जोड़ते हैं, बल्कि पूरे समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम भी करते हैं।