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होर्मुज के तनाव के बीच भारत को राहत: 20 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर ‘जग विक्रम’ कांडला पोर्ट पहुंचा

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की अनिश्चितता के बीच भारत के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर ‘जग विक्रम’ सफलतापूर्वक होर्मुज पार कर गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंच गया है। यह जहाज करीब 20 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया है और संघर्ष विराम के बाद इस मार्ग से गुजरने वाला पहला भारतीय जहाज बन गया है।

संघर्ष विराम के बाद पहली बड़ी समुद्री सफलता

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव के बाद घोषित अस्थायी संघर्ष विराम का असर अब समुद्री गतिविधियों पर भी दिखने लगा है। इसी के तहत ‘जग विक्रम’ नामक भारतीय एलपीजी टैंकर ने सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया। यह जहाज शुक्रवार रात से शनिवार सुबह के बीच इस संवेदनशील मार्ग से गुजरा और फिर ओमान की खाड़ी में प्रवेश कर भारत की ओर बढ़ा। बुधवार को यह गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंच गया, जो ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।

भारतीय जहाजों की आवाजाही में धीरे-धीरे सुधार

मार्च की शुरुआत से अब तक फारस की खाड़ी से बाहर निकलने वाले भारतीय जहाजों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। ‘जग विक्रम’ के अलावा कई अन्य जहाज भी सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं, हालांकि अभी भी लगभग 15 भारतीय जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं और स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। संघर्ष के शुरुआती दौर में कुल 28 भारतीय जहाज इस इलाके में मौजूद थे, जिनमें से अधिकतर पश्चिमी हिस्से में थे। धीरे-धीरे इनकी सुरक्षित निकासी हो रही है, जिससे राहत की उम्मीद बढ़ी है।

ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम लाइफलाइन है होर्मुज

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत, करीब आधी प्राकृतिक गैस और लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। इनका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और होर्मुज जलडमरूमध्य इस आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करता है।

आपूर्ति प्रभावित होने से बढ़ी थी चिंता

हालिया संघर्ष के दौरान होर्मुज मार्ग पर जोखिम बढ़ने से भारत में एलपीजी और गैस आपूर्ति पर असर पड़ा था। विशेष रूप से वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी थी, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया था। हालांकि अब ‘जग विक्रम’ जैसे जहाजों के पहुंचने से स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी है और आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर बढ़ रही है।

आगे भी बनी रहेगी नजर

हालांकि संघर्ष विराम से हालात में कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन क्षेत्र की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। भारत समेत दुनिया के कई देश इस अहम समुद्री मार्ग पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर काफी कुछ निर्भर करेगा। फिलहाल ‘जग विक्रम’ का सुरक्षित पहुंचना भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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