अलवर में महात्मा ज्योतिराव फुले जयंती: शिक्षा और समानता का संदेश गूंजा
अलवर में महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई, जहां जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने उनके विचारों को याद करते हुए शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उमड़ा जनसमूह
अलवर के ज्योतिबा फूले सर्किल पर आयोजित जयंती कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में पहुंचे। सभी ने महात्मा फुले की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में सम्मान और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। लोगों ने एकजुट होकर फुले के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन समाज में उनके योगदान को याद करने और नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।
टीकाराम जूली ने शिक्षा को बताया सबसे बड़ा हथियार
कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने महात्मा फुले को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष, समानता और शिक्षा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि फुले ने समाज में फैली कुरीतियों और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और शिक्षा को परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया। जूली ने युवाओं से अपील की कि वे फुले के विचारों को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अपनी भूमिका निभाएं। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने भी जताई श्रद्धा
कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों की भी सक्रिय भागीदारी रही। एसडीएम माधव भारद्वाज ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए कहा कि महात्मा फुले ने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए जो कार्य किए, वे आज भी प्रेरणादायक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों के विचारों को अपनाकर ही समाज में वास्तविक समानता स्थापित की जा सकती है। इस तरह के आयोजनों से समाज में जागरूकता बढ़ती है और लोगों को सकारात्मक दिशा मिलती है।
समानता और सामाजिक न्याय का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने एक स्वर में महात्मा फुले के सिद्धांतों को अपनाने और समाज में समानता स्थापित करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में भी फुले के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। शिक्षा, समान अवसर और सामाजिक न्याय के उनके सिद्धांत समाज को मजबूत बनाने की नींव हैं। आयोजन ने लोगों को एकजुट कर सामाजिक बदलाव की दिशा में प्रेरित किया।