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खड़गे के ‘सांप’ बयान पर सियासी बवाल, जयपुर में थाने तक पहुंचा मामला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक विवादित बयान ने देश की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर की गई उनकी टिप्पणी को लेकर विरोध तेज हो गया है। जयपुर में इस बयान के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है, जिससे मामला अब राजनीतिक के साथ-साथ कानूनी रूप भी लेता दिख रहा है।

जयपुर में दर्ज हुई शिकायत, जांच शुरू

खड़गे के बयान को लेकर जयपुर के अशोक नगर थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और वन्यजीव प्रेमी सूरज सोनी की ओर से दी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खड़गे के बयान ने न केवल राजनीतिक भावनाओं को भड़काया, बल्कि आम जनता को भी हिंसा के लिए उकसाने जैसा संदेश दिया। पुलिस ने परिवाद दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। थाना अधिकारी के अनुसार, सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों की जांच की जा रही है और आवश्यक होने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वन्यजीव कानून का हवाला, गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता ने अपने परिवाद में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लेख करते हुए कहा कि सांप एक संरक्षित प्रजाति है, जिसे नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध है। आरोप है कि खड़गे के बयान में सांप को मारने की बात कहकर लोगों को कानून तोड़ने के लिए उकसाया गया। इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता की धाराओं का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि किसी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ हिंसा भड़काना दंडनीय अपराध है। शिकायत में इस बयान को गंभीर आपराधिक कृत्य बताते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

क्या था खड़गे का विवादित बयान?

विवाद की जड़ खड़गे का वह बयान है, जिसमें उन्होंने एक जनसभा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की तुलना जहरीले सांप से की थी। उन्होंने कहा था कि जैसे जहरीले सांप से बचाव के लिए उसे खत्म करना जरूरी होता है, उसी तरह इन संगठनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाना चाहिए। इस बयान को भाजपा ने आपत्तिजनक और हिंसा को बढ़ावा देने वाला बताया है, जबकि कांग्रेस की ओर से इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बताया जा रहा है।

राजनीतिक घमासान तेज, आरोप-प्रत्यारोप जारी

इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने खड़गे के बयान को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कड़ी निंदा की है और कार्रवाई की मांग उठाई है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल में तनाव को और बढ़ाते हैं। फिलहाल मामला जांच के दायरे में है, लेकिन इसके राजनीतिक असर आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है।

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