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गहलोत का भाजपा पर हमला: “मुगलों के समय नहीं था डर, आज क्यों बताया जा रहा है हिंदू खतरे में?”

जयपुर में दांडी यात्रा के समापन की वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने भाजपा पर धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि मुगल और अंग्रेज शासन के दौरान भी हिंदू समाज पर अस्तित्व का संकट नहीं था, लेकिन आज के माहौल में डर का माहौल क्यों बनाया जा रहा है। गहलोत ने महात्मा गांधी के विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए शांति और अहिंसा की जरूरत पर जोर दिया।

धर्म की राजनीति पर सवाल

Ashok Gehlot ने अपने संबोधन में कहा कि देश में धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता के बीच यह धारणा बनाई जा रही है कि हिंदू खतरे में हैं, जबकि इतिहास इस बात की पुष्टि नहीं करता। उन्होंने कहा कि 200 साल के अंग्रेजी शासन और लगभग 500 साल के मुगल काल में भी ऐसा माहौल नहीं था। गहलोत ने सवाल उठाया कि आज जब लोकतांत्रिक व्यवस्था है, तब इस तरह का डर क्यों फैलाया जा रहा है।

गांधी के विचारों की प्रासंगिकता

कार्यक्रम Dandi March की वर्षगांठ पर आयोजित किया गया था, जहां गहलोत ने Mahatma Gandhi के विचारों को याद किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी का अहिंसा और शांति का मार्ग आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना स्वतंत्रता आंदोलन के समय था। गहलोत के अनुसार, वर्तमान वैश्विक और राष्ट्रीय परिस्थितियों में संवाद, सहिष्णुता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि समाज में बढ़ती कटुता को कम किया जा सके।

वैश्विक तनाव पर चिंता जताई

गहलोत ने अपने भाषण में अंतरराष्ट्रीय हालात का भी जिक्र किया और कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और युद्ध की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने Russia-Ukraine War सहित अन्य तनावपूर्ण हालातों का हवाला देते हुए कहा कि विश्व स्तर पर अस्थिरता बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत जैसे देश की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह शांति और सह-अस्तित्व का संदेश दे। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम करते हैं।

युवाओं की भूमिका पर जोर

पूर्व मुख्यमंत्री ने युवाओं से देश के मौजूदा हालात को समझने और सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। Ashok Gehlot ने कहा कि युवाओं को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश किस दिशा में जा रहा है, यह समझना और उस पर विचार करना युवाओं की जिम्मेदारी है, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।

संस्थाओं पर दबाव का आरोप

गहलोत ने यह भी कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने न्यायपालिका और सरकारी संस्थाओं के स्वतंत्र कामकाज पर चिंता जताई। उनका कहना था कि यदि संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाएंगी, तो लोकतंत्र कमजोर होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में राजनीतिक लाभ के लिए माहौल को प्रभावित किया जा रहा है, जो दीर्घकाल में देश के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

भाजपा पर तीखा हमला और भविष्य की रणनीति

अपने बयान के अंत में Ashok Gehlot ने कहा कि अब भाजपा की नीतियों को लेकर जनता के बीच सवाल उठने लगे हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की है कि गांधीजी के विचारों को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए। गहलोत ने अपनी पूर्व सरकार के दौरान शुरू किए गए ‘पीस एंड नॉन वायलेंस’ विभाग का भी जिक्र किया और कहा कि आने वाले समय में प्रशिक्षित नई पीढ़ी सामाजिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होगी।

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