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भाजपा स्थापना दिवस पर वसुंधरा राजे की स्पष्ट चेतावनी: “दल बदलू नेताओं से सावधान रहे संगठन, मूल कार्यकर्ता ही ताकत”

जयपुर में भाजपा के 47वें स्थापना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने संगठन और सरकार को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी की असली ताकत उसके मूल और समर्पित कार्यकर्ता हैं, जबकि दल बदलकर आने वाले अवसरवादी नेताओं से संगठन को खतरा हो सकता है। कार्यक्रम में संगठनात्मक एकता, विचारधारा और कार्यकर्ताओं के सम्मान पर विशेष जोर दिया गया।

स्थापना दिवस पर संगठनात्मक एकता का संदेश

भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस पर जयपुर स्थित प्रदेश मुख्यालय में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि बूथ स्तर के अध्यक्षों को वरिष्ठ नेताओं के साथ मंच पर स्थान दिया गया, जो पार्टी की जमीनी संरचना को सम्मान देने का प्रतीक माना गया। इस अवसर पर वरिष्ठ कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों का सम्मान भी किया गया। आयोजन के माध्यम से पार्टी ने स्पष्ट किया कि संगठन की मजबूती केवल शीर्ष नेतृत्व से नहीं, बल्कि निचले स्तर तक जुड़े कार्यकर्ताओं की भागीदारी से आती है।

राजे की चेतावनी: अवसरवादी राजनीति से खतरा

अपने संबोधन में वसुंधरा राजे ने दल बदलने वाले नेताओं को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जो केवल स्वार्थ के लिए पार्टी बदलते हैं, वे संगठन की विचारधारा के प्रति पूरी तरह समर्पित नहीं होते। कई बार वे पार्टी बदल लेते हैं, लेकिन उनकी सोच और निष्ठा नहीं बदलती। इस कारण वे संगठन के लिए चुनौती बन सकते हैं। राजे ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ लोग पार्टी में आकर पूरी तरह समाहित हो जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद सतर्क रहना जरूरी है ताकि संगठन की मूल भावना कमजोर न पड़े।

मूल कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने पर जोर

राजे ने स्पष्ट कहा कि पार्टी में जिम्मेदारियां केवल उन्हीं लोगों को मिलनी चाहिए, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं और उसकी विचारधारा के प्रति निष्ठावान हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई नेता एक दल से चुनाव जीतकर दूसरे दल में चले जाते हैं और फिर परिस्थितियों के अनुसार वापस लौट आते हैं, जो राजनीतिक स्थिरता के लिए ठीक नहीं है। ऐसे में संगठन को नियुक्तियों और दायित्वों के समय कार्यकर्ताओं की पृष्ठभूमि और समर्पण की गंभीरता से जांच करनी चाहिए, ताकि सही लोगों को ही आगे बढ़ाया जा सके।

विचारधारा सर्वोपरि, सत्ता नहीं: अटल का उदाहरण

राजे ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा की पहचान उसकी विचारधारा और नैतिक मूल्यों से है। उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने हमेशा सिद्धांतों को प्राथमिकता दी और यह दिखाया कि सत्ता से अधिक महत्वपूर्ण विचारधारा होती है। राजे ने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे पार्टी के मूल सिद्धांतों से कभी समझौता न करें और संगठन को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाते रहें।

जनसंघ से भाजपा तक: संघर्ष और विस्तार की कहानी

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने भाजपा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पार्टी की जड़ें जनसंघ से जुड़ी हैं और इसका निर्माण त्याग व बलिदान की नींव पर हुआ है। उन्होंने श्यामाप्रसाद मुखर्जी और भीमराव अंबेडकर

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