हाईवे किनारे निर्माण पर सख्त कार्रवाई, 75 मीटर दायरे में चलेगा बुलडोजर
राजस्थान में नेशनल और स्टेट हाईवे के किनारे बने अवैध निर्माणों पर अब सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हाईवे के सेंटर पॉइंट से 75 मीटर के दायरे में आने वाले ढाबे, होटल, दुकानें और अन्य निर्माण हटाए जाएंगे। इस फैसले का असर उन लोगों पर भी पड़ेगा, जिन्होंने हाल ही में हाईवे किनारे प्लॉट लेकर निर्माण किया है। प्रशासनिक स्तर पर सर्वे और चिन्हांकन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
कोर्ट का सख्त संदेश: जान की कीमत सबसे ऊपर
हिम्मत सिंह गहलोत बनाम राज्य सरकार मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी अवैध निर्माण से ज्यादा महत्वपूर्ण लोगों की जान है। यही वजह है कि 75 मीटर के भीतर बने सभी निर्माणों को नियमों के खिलाफ माना जाएगा। आदेश के अनुसार, चाहे निर्माण छोटा हो या बड़ा, यदि वह निर्धारित सीमा में आता है तो उसे हटाया जाएगा। इस फैसले से हाईवे किनारे बढ़ते अतिक्रमण पर अंकुश लगाने की उम्मीद है।
परमिशन होने पर भी नहीं बचेगा निर्माण
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि यदि किसी होटल, ढाबे या दुकान को स्थानीय निकाय या पंचायत से अनुमति मिली हुई है, तब भी वह सुरक्षित नहीं है। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि यदि अनुमति नियमों के विपरीत दी गई है, तो वह स्वतः निरस्त मानी जाएगी। यानी गलत तरीके से ली गई परमिशन अब किसी काम की नहीं रहेगी। प्रशासन ऐसे सभी मामलों की समीक्षा कर रहा है और अवैध रूप से दिए गए पट्टों और मंजूरियों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
हाईवे किनारे जमीन खरीदने वालों के लिए चेतावनी
सरकार और प्रशासन ने आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि कोई व्यक्ति हाईवे के पास जमीन खरीदने या निर्माण करने की योजना बना रहा है, तो उसे पहले भूमि रिकॉर्ड और नियमों की पूरी जांच करनी होगी। बिना जांच के किया गया निवेश भविष्य में भारी नुकसान का कारण बन सकता है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों के खिलाफ किया गया कोई भी निर्माण कभी भी हटाया जा सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सड़क श्रेणियों के अनुसार तय की गई दूरी
राज्य सरकार ने विभिन्न श्रेणी की सड़कों के लिए निर्माण की न्यूनतम दूरी भी तय कर दी है। नेशनल और स्टेट हाईवे के लिए यह दूरी 75-75 मीटर रखी गई है, जबकि मुख्य जिला सड़कों (MDR) के लिए 50 मीटर तय है। अन्य जिला सड़कों (ODR) के लिए 17.5 मीटर और ग्रामीण सड़कों के लिए 15 मीटर की सीमा निर्धारित की गई है। इन नियमों का पालन अनिवार्य होगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे भविष्य में अनियोजित निर्माण और अतिक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी।