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ईरान सीमा पर तैनात अमेरिकी सेना हमला क्यों नहीं कर रही? दुनिया इंतजार में


मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच United States और Iran आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी सैन्य जहाज़ और युद्धक तैयारियां ईरान के आसपास बढ़ चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई हमला नहीं हुआ। ऐसे में बड़ा सवाल है—क्या यह युद्ध से पहले की शांति है या कूटनीति का अंतिम मौका?


🔹 सैन्य तैयारी, लेकिन हमला क्यों नहीं?

अमेरिका ने क्षेत्र में नौसैनिक और सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर साफ संकेत दिया है कि वह किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तुरंत युद्ध की तैयारी नहीं बल्कि “डिटरेंस” यानी शक्ति प्रदर्शन की रणनीति है।

सीमा पर सैन्य तैनाती अक्सर विरोधी देश पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए की जाती है ताकि बिना गोली चलाए राजनीतिक लक्ष्य हासिल किए जा सकें।


🔹 कूटनीति और दबाव की दोहरी रणनीति

स्थिति को जटिल इसलिए माना जा रहा है क्योंकि दोनों देश बातचीत भी कर रहे हैं और सैन्य तैयारी भी जारी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया कि अमेरिका समझौता चाहता है, लेकिन सुरक्षा खतरे में आई तो सैन्य विकल्प खुले हैं।

इसके जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei ने साफ कहा कि उनका देश दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा। वहीं ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने सम्मानजनक समझौते की बात दोहराई।


🔹 असली विवाद: परमाणु कार्यक्रम या शक्ति संतुलन?

ऊपरी तौर पर विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार क्षमता की ओर बढ़ रहा है।

ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा, चिकित्सा और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए है।

विशेषज्ञों के अनुसार असली संघर्ष तकनीक से ज्यादा मध्य-पूर्व में क्षेत्रीय प्रभाव और शक्ति संतुलन को लेकर है।


🔹 2015 परमाणु समझौता और भरोसे का संकट

2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति Barack Obama के कार्यकाल में ऐतिहासिक परमाणु समझौता हुआ था।

  • ईरान ने यूरेनियम संवर्धन सीमित करने पर सहमति दी
  • अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण स्वीकार किए
  • बदले में आर्थिक प्रतिबंध हटाए गए

लेकिन 2018 में अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने के बाद भरोसे का संकट पैदा हुआ और तनाव फिर बढ़ता चला गया।


🔹 अमेरिका अभी हमला क्यों नहीं कर रहा — 5 बड़ी वजहें

1. युद्ध की भारी कीमत – मध्य-पूर्व में बड़ा युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार को झटका दे सकता है।

2. कूटनीतिक रास्ता खुला – बातचीत जारी रहने से सैन्य कार्रवाई अंतिम विकल्प बनी हुई है।

3. क्षेत्रीय युद्ध का खतरा – ईरान के सहयोगी समूह पूरे क्षेत्र को संघर्ष में खींच सकते हैं।

4. वैश्विक दबाव – यूरोप और अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्ध के बजाय समाधान चाहता है।

5. रणनीतिक मनोवैज्ञानिक दबाव – सैन्य तैनाती से बिना युद्ध के राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश।


🔹 आगे क्या हो सकता है?

मौजूदा हालात तीन संभावनाओं की ओर इशारा करते हैं:

  • ✅ कूटनीतिक समझौता
  • ⚠️ सीमित सैन्य टकराव
  • ❗ क्षेत्रीय बड़े युद्ध का खतरा

फिलहाल दोनों देश “युद्ध से पहले की रणनीतिक शतरंज” खेलते नजर आ रहे हैं, जहां हर कदम वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

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