‘खामोश’ अब बिना इजाज़त नहीं: हाई कोर्ट ने सेलेब्रिटी इमिटेशन पर लगाई रोक
बॉम्बे हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश
बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभिनेता-राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा से जुड़े कंटेंट के गलत इस्तेमाल पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, डायलॉग और आवाज के इस्तेमाल से बने ऑनलाइन कंटेंट पर रोक लगा दी है।
16 फरवरी को आया आदेश, तुरंत हटाने के निर्देश
16 फरवरी को पारित अंतरिम आदेश में न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे सभी कंटेंट तत्काल हटाने के निर्देश दिए। साथ ही, भविष्य में भी इस तरह का कंटेंट अपलोड न करने को कहा गया है।
‘खामोश’ डायलॉग को बताया पहचान का हिस्सा
हाई कोर्ट ने कहा कि शत्रुघ्न सिन्हा का मशहूर डायलॉग ‘खामोश’ उनकी विशिष्ट पहचान का अहम हिस्सा है। अदालत के अनुसार, पर्दे पर इस डायलॉग को बोलने की उनकी खास शैली सीधे तौर पर उनके व्यक्तित्व से जुड़ी हुई है और इसका व्यावसायिक या डिजिटल दुरुपयोग नहीं किया जा सकता।
पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा पर जोर
अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्सनैलिटी राइट्स में व्यक्ति का नाम, छवि, आवाज, शैली और व्यक्तित्व से जुड़ी पहचान शामिल होती है। किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इनका बिना अनुमति उपयोग कानूनन गलत है, खासकर तब जब इसका इस्तेमाल लाभ कमाने के लिए किया जा रहा हो।
AI से बनी फर्जी प्रोफाइल और मॉर्फ कंटेंट पर आपत्ति
न्यायालय ने एआई तकनीक के जरिए बनाए जा रहे फर्जी प्रोफाइल, मॉर्फ की गई तस्वीरों और वीडियो पर चिंता जताई। अदालत ने माना कि इस तरह का डिजिटल हेरफेर व्यक्ति की छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है, जो पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन है।
याचिका में क्या मांग की गई थी?
अधिवक्ता हिरेन कमोड के माध्यम से दायर याचिका में शत्रुघ्न सिन्हा की पहचान से जुड़े तत्वों—नाम, फोटो, आवाज और ‘खामोश’ जैसे प्रसिद्ध डायलॉग—के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने इन मांगों को प्रथम दृष्टया सही माना।
अगली सुनवाई 30 मार्च को
मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सेलेब्रिटीज़ के पर्सनैलिटी राइट्स के दुरुपयोग के मामलों में सख्ती बढ़ाई जाएगी।