सदन में ‘2 बनाम 5 साल’ बहस से पीछे हटी सरकार, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का सीएम पर तीखा हमला
जयपुर | 21 फरवरी 2026
राजस्थान विधानसभा में शनिवार को ‘2 साल बनाम 5 साल’ के कार्यकाल की तुलना को लेकर तय चर्चा से सरकार के पीछे हटने पर विपक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर आरोप लगाया कि पहले दी गई चुनौती के बावजूद सरकार ने ऐन वक्त पर प्रस्ताव बदल दिया, जिससे तय तुलना पर चर्चा नहीं हो सकी।
कार्य सलाहकार समिति के निर्णय से अलग प्रस्ताव लाने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन के भीतर ‘2 साल बनाम 5 साल’ के कार्यकाल पर चर्चा कराने की घोषणा की गई थी और यह विषय कार्य सलाहकार समिति (BAC) में भी तय हुआ था। हालांकि, बाद में प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव में 5 साल की अवधि का उल्लेख नहीं किया गया। विपक्ष का कहना है कि इससे सदन में तय एजेंडे से हटकर विषय बदला गया।
विकास कार्यों के आंकड़ों पर चर्चा से बचने का दावा
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि सरकार विकास से जुड़े आंकड़ों पर सीधी बहस से बच रही है। उनका कहना है कि तय तुलना होती तो पिछली सरकार और मौजूदा सरकार के कार्यकाल के कामकाज पर विस्तृत चर्चा संभव थी। विपक्ष ने सरकार से उसी मूल प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग दोहराई।
कॉलेज भवन निर्माण को लेकर श्रेय लेने पर सवाल
विपक्ष ने कॉलेज भवन निर्माण को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाए। जूली ने कहा कि जिन कॉलेज भवनों के निर्माण का श्रेय मौजूदा सरकार ले रही है, उनमें से कई परियोजनाएं पूर्ववर्ती सरकार के दौरान शुरू हुई थीं और उनका कार्य बाद में पूरा हुआ। उन्होंने कार्य प्रारंभ तिथि और कार्य पूर्ण तिथि सार्वजनिक करने की मांग की।
मेडिकल कॉलेजों के दावों पर भी उठाए गए प्रश्न
नेता प्रतिपक्ष ने मेडिकल कॉलेजों के निर्माण से जुड़े दावों पर भी स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान कई मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और स्वीकृतियां दी गई थीं। विपक्ष ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि किन मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य मौजूदा कार्यकाल में शुरू हुआ।
मूल प्रस्ताव पर बहस कराने की मांग
विपक्ष ने कहा कि सदन चर्चा का मंच है और सरकार को तय एजेंडे पर बहस से पीछे नहीं हटना चाहिए। टीकाराम जूली ने मांग की कि ‘2 साल बनाम 5 साल’ के मूल प्रस्ताव पर पूरी चर्चा कराई जाए, ताकि दोनों कार्यकालों के कामकाज की तुलना सदन और जनता के सामने आ सके।