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बाबरी मस्जिद नाम पर रोक की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका ठुकराईबाबरी मस्जिद के नाम पर देशभर में रोक की मांग

देश में “बाबरी मस्जिद” या “बाबर” के नाम से किसी मस्जिद के निर्माण या नामकरण पर रोक लगाने की मांग को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में आग्रह किया गया था कि ऐतिहासिक विवादों को देखते हुए भविष्य में इस नाम का उपयोग किसी धार्मिक स्थल के लिए न किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस जनहित याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति या ऐतिहासिक चरित्र के नाम पर देशभर में धार्मिक स्थलों के निर्माण या नामकरण पर सामान्य प्रतिबंध लगाने का आधार कानून में नहीं है।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि बाबर को आक्रमणकारी बताया गया और उसके नाम पर किसी मस्जिद का निर्माण या नामकरण नहीं होना चाहिए। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि ऐसे नामकरण को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने क्यों ठुकराई याचिका

अदालत ने कहा कि इस तरह की मांगें व्यापक और अस्पष्ट हैं। किसी ऐतिहासिक व्यक्ति के नाम के आधार पर देशभर में धार्मिक स्थलों पर रोक लगाने का कोई संवैधानिक या वैधानिक आधार नहीं बनता। कोर्ट ने जनहित याचिका को विचार योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया।

बंगाल से जुड़े घटनाक्रम का हवाला

यह मामला उस समय चर्चा में आया जब हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण से जुड़ी घोषणा की गई। बताया गया कि 6 दिसंबर 2025 को प्रतीकात्मक रूप से शिलान्यास किया गया था और 11 फरवरी से निर्माण कार्य शुरू होने की बात सामने आई थी, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।

फैसले के बाद क्या बदलेगा

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद “बाबरी मस्जिद” या “बाबर” नाम पर देशभर में किसी प्रकार की सामान्य रोक लगाने की मांग को कानूनी समर्थन नहीं मिला है। अदालत के रुख से यह स्पष्ट हुआ है कि नामकरण या निर्माण से जुड़े मामलों में अलग-अलग परिस्थितियों और कानून के तहत ही निर्णय लिए जा सकते हैं।

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Stv News Rajasthan

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