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व्यापमं केस में हाईकोर्ट सख्त, तथ्य छिपाने पर आरोपी दंपती को फटकारयाचिका में छिपाई गई अहम जानकारी

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। आरोपी डॉ. जगदीश सगर और उनकी पत्नी सुनीता सगर द्वारा दायर याचिका में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि न्यायालय के समक्ष सभी तथ्य स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना याचिकाकर्ताओं की जिम्मेदारी होती है।

अपील लंबित होने की बात नहीं बताई

सगर दंपती ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में एक याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान सामने आया कि संपत्ति अटैचमेंट के खिलाफ उनकी अपील पहले से ही ट्रिब्यूनल में लंबित है, लेकिन इस तथ्य का जिक्र याचिका में नहीं किया गया। इस चूक पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की।

ईडी की कार्रवाई को दी गई थी चुनौती

यह याचिका प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सगर दंपती की संपत्तियों को अटैच किए जाने के खिलाफ दायर की गई थी। सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ताओं के वकील ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिस पर अदालत ने मामले की पृष्ठभूमि स्पष्ट करने को कहा।

न्यायालय ने आचरण को बताया गलत

कोर्ट के समक्ष यह तर्क दिया गया कि याचिका किसी अन्य वकील द्वारा ड्राफ्ट की गई थी, इसलिए अपील लंबित होने की जानकारी शामिल नहीं हो सकी। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि तथ्यों को छिपाना या अधूरी जानकारी देना गलत आचरण की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी दर्ज की।

याचिका वापस, कोई कार्रवाई नहीं

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं ने स्वयं याचिका वापस लेने की मांग की है, इसलिए उनके खिलाफ कोई अलग से कार्रवाई शुरू नहीं की जा रही है। अदालत ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया।

व्यापमं घोटाले से जुड़ा है मामला

डॉ. जगदीश सगर व्यापमं घोटाले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं। आरोप है कि उन्होंने फर्जी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षाएं दिलवाने के नेटवर्क में भूमिका निभाई थी। इसी सिलसिले में उनकी संपत्तियों पर कार्रवाई की गई थी, जिसे लेकर यह मामला अदालत पहुंचा था।

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