क्या है संविधान का अनुच्छेद 142? जानिए कैसे सुप्रीम कोर्ट ने दिलाई मेडिकल सीट
⚖️ क्या है अनुच्छेद 142?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को “संपूर्ण न्याय” (Complete Justice) करने की विशेष शक्ति देता है। यह प्रावधान Supreme Court of India को किसी भी मामले में ऐसा आदेश देने का अधिकार देता है, जो न्याय सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हो — भले ही उसके लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद न हो।
इसका उद्देश्य यह है कि तकनीकी अड़चनों या प्रक्रिया संबंधी बाधाओं के कारण किसी को न्याय से वंचित न होना पड़े।
🏛️ सुप्रीम कोर्ट को क्या मिलती है ताकत?
अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट:
- किसी भी अदालत के आदेश को पलट सकता है।
- न्याय के हित में विशेष निर्देश जारी कर सकता है।
- केंद्र या राज्य सरकारों को जरूरी कदम उठाने का आदेश दे सकता है।
- ऐसे मामलों में फैसला दे सकता है, जहां कानून स्पष्ट न हो या अपूर्ण हो।
हालांकि, यह शक्ति असीमित नहीं है। कोर्ट इसे केवल असाधारण परिस्थितियों में और न्याय के व्यापक हित में इस्तेमाल करता है।
🎓 ताजा मामला: छात्र को कैसे मिली मेडिकल सीट?
मध्य प्रदेश के छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने दो बार NEET परीक्षा पास की, लेकिन तकनीकी कारणों से उसे एमबीबीएस में प्रवेश नहीं मिल पाया। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुनवाई के दौरान छात्र ने खुद अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने उसकी दलीलें सुनीं और पाया कि उसके साथ अन्याय हुआ है। इसके बाद अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि छात्र को एमबीबीएस कोर्स में दाखिला दिया जाए।
यह फैसला इस बात का उदाहरण है कि अदालत केवल कानून की व्याख्या ही नहीं करती, बल्कि जरूरत पड़ने पर न्याय सुनिश्चित भी करती है।
📌 पहले भी हो चुका है इस्तेमाल
अनुच्छेद 142 का उपयोग सुप्रीम कोर्ट कई महत्वपूर्ण मामलों में कर चुका है, जैसे:
- तलाक के बाद महिलाओं को स्टैंप ड्यूटी में राहत देने का मामला
- बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दिशा-निर्देश
- फीस विवाद में आईआईटी छात्र को राहत
- Chandigarh मेयर चुनाव के नतीजों को पलटना
इन मामलों में कोर्ट ने प्रक्रिया से आगे बढ़कर न्याय के व्यापक सिद्धांत को प्राथमिकता दी।
🔍 संसद और राष्ट्रपति की भूमिका क्या है?
अनुच्छेद 142 के तहत दिए गए आदेश को लागू करवाने की जिम्मेदारी संबंधित सरकारों की होती है। यदि किसी फैसले को लागू करने के लिए कानून बनाने की जरूरत हो, तो संसद कानून बना सकती है।
अगर संसद इस पर कानून नहीं बनाती, तो कार्यान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं।
📊 क्यों खास है अनुच्छेद 142?
अनुच्छेद 142 भारतीय न्यायपालिका को लचीला और प्रभावी बनाता है। यह अदालत को “न्याय के हित” में अंतिम शब्द कहने की शक्ति देता है।
हालांकि, इस शक्ति को लेकर बहस भी होती रही है कि कहीं यह न्यायपालिका द्वारा कानून निर्माण (Judicial Overreach) का रूप तो नहीं ले लेता। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि इसका प्रयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में और न्याय सुनिश्चित करने के लिए ही किया जाएगा।
अनुच्छेद 142 भारतीय संविधान की एक अनोखी और शक्तिशाली व्यवस्था है। हालिया मेडिकल सीट वाले मामले में इसका इस्तेमाल दिखाता है कि जब प्रक्रिया और तकनीकी बाधाएं न्याय के रास्ते में आती हैं, तब सुप्रीम कोर्ट “संपूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए आगे आ सकता है।